प्रो. शुभा फड़के
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प्रो. शुभा फड़के मेडिकल जेनेटिक्स में देश की पहली डीएम स्टूडेंट थी। जब चिकित्सा शिक्षा और विज्ञान अनुवांशिक रोगों के बारे में बहुत कम लोग जानते थे, तब ही उन्होंने इसमें महारथ हासिल करने का लक्ष्य तय कर लिया था। अपने 27 साल के कॅरिअर में वह 40 से अधिक अनुवांशिक रोग विशेषज्ञ तैयार कर चुकी हैं, जो देश भर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
इस समय देश में मौजूद 90 फीसदी से अधिक अनुवांशिक रोग विशेषज्ञ एसजीपीजीआई से ही पढ़कर निकले हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं संजय गांधी पीजीआई के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की हेड प्रो. शुभा फड़के की, जिन्हें शक्ति स्वरूपा को सही मायने में चरितार्थ किया है।
संजय गांधी पीजीआई से 1990 में मेडिकल जेनेटिक्स में डीएम की डिग्री लेने वाली प्रो. शुभा फड़के इस समय उसी विभाग की हेड हैं। हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, डाउन सिंड्रोम सहित 40 से अधिक अनुवांशिक बीमारियों की पहचान, उसका इलाज, भविष्य में इन बीमारियों से पीड़ित बच्चे न पैदा हों, इसी अभियान में वह जी जान से जुटी हैं।
इस समय हीमोफीलिया और थैलेसीमिया के 1200 बच्चों का वहां इलाज चल रहा है। इसके अलावा लगभग 100 से अधिक बच्चे वहां नए हर साल पहुंच रहे हैं। उनके प्रयासों की ही देन है कि प्रदेश सरकार इन बीमारियों से पीड़ित बच्चों के फ्री इलाज के लिए विशेष बजट देता हैं।