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40 से ज्यादा आनुवांशिक रोग विशेषज्ञ तैयार कर चुकी हैं प्रो. शुभा फड़के

Tue, 26 Sep 2017 10:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रो. शुभा फड़के - फोटो : amarujala
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प्रो. शुभा फड़के मेडिकल जेनेटिक्स में देश की पहली डीएम स्टूडेंट थी। जब चिकित्सा शिक्षा और विज्ञान अनुवांशिक रोगों के बारे में बहुत कम लोग जानते थे, तब ही उन्होंने इसमें महारथ हासिल करने का लक्ष्य तय कर लिया था। अपने 27 साल के कॅरिअर में वह 40 से अधिक अनुवांशिक रोग विशेषज्ञ तैयार कर चुकी हैं, जो देश भर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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इस समय देश में मौजूद 90 फीसदी से अधिक अनुवांशिक रोग विशेषज्ञ एसजीपीजीआई से ही पढ़कर निकले हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं संजय गांधी पीजीआई के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की हेड प्रो. शुभा फड़के की, जिन्हें शक्ति स्वरूपा को सही मायने में चरितार्थ किया है।

संजय गांधी पीजीआई से 1990 में मेडिकल जेनेटिक्स में डीएम की डिग्री लेने वाली प्रो. शुभा फड़के इस समय उसी विभाग की हेड हैं। हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, डाउन सिंड्रोम सहित 40 से अधिक अनुवांशिक बीमारियों की पहचान, उसका इलाज, भविष्य में इन बीमारियों से पीड़ित बच्चे न पैदा हों, इसी अभियान में वह जी जान से जुटी हैं।
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इस समय हीमोफीलिया और थैलेसीमिया के 1200 बच्चों का वहां इलाज चल रहा है। इसके अलावा लगभग 100 से अधिक बच्चे वहां नए हर साल पहुंच रहे हैं। उनके प्रयासों की ही देन है कि प्रदेश सरकार इन बीमारियों से पीड़ित बच्चों के फ्री इलाज के लिए विशेष बजट देता हैं।
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​डॉक्टरों के लिए जागरूकता कार्यक्रम

प्रो. शुभा फड़के - फोटो : डेमो
किसी भी दंपति को अनुवांशिक रोग से पीड़ित बच्चे न पैदा हो इसके लिए विशेष स्क्रीनिंग (जांच) की सुविधा भी उन्होंने शुरू की। माइक्रो एरे तकनीक से गर्भस्थ शिशु की क्रोमोसोम मेें गड़बड़ी का पता लगाने की सुविधा भी उन्होंने शुरू कराई। इससे मंदबुद्धि बच्चे की गर्भ में ही पहचानकर उसे जन्म लेने से रोका जा सकता है। अभी ये जांच सिर्फ प्रदेश में एसजीपीजीआई में ही है।

अनुवांशिक रोगों की समय से पहचान के लिए उनके नेतृत्व में हर साल एसजीपीजीआई में 15 दिन का एक विशेष पाठ्यक्रम चलाया जाता है। इसमें देश भर से आए चिकित्सकों को इस रोग के बारे में जागरूक किया जाता है। ताकि वे दंपतियों को जागरूक करें और समय से बीमारी की पहचानकर उसे एसजीपीजीआई के लिए रेफर करें। अब तक इस तरह के 16 बैच में 500 से अधिक चिकित्सक वहां से प्रशिक्षित होकर निकल चुके हैं।
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