पिछले मार्च में कानपुर के घाटमपुर में जहरीली शराब से 6 लोगों की मौत हो गई थी। फरवरी में सहारनपुर और कुशीनगर में 88 लोगों की मौत अवैध शराब पीने से हो गई थी। पिछले वर्ष मई में कानपुर के सचेंडी और कानपुर देहात में जहरीली शराब पीने से एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।
जुलाई 2017 में आजमगढ़ में अवैध शराब पीने से 25 लोगों की मौत हो गई थी। 12 जनवरी 2018 को बाराबंकी में अवैध शराब पीने से 9 लोगों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं के बाद सरकार ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की थी और आधा दर्जन से अधिक लोगों को निलंबित किया गया था। पिछली हर घटना के बाद सात से 15 दिन तक का विशेष अभियान चलाकर पूरे प्रदेश में लाखों लीटर अवैध शराब पकड़ी गई।
डीजीपी मुख्यालय के आंकड़ों की मानें तो बीते चुनाव के दौरान पुलिस की मुस्तैदी की वजह से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। चुनाव के दौरान पुलिस और आबकारी विभाग ने अवैध शराब की 1909 भट्ठियां नष्ट की थीं। इसके अतिरिक्त 7,78,798 लीटर अवैध देसी शराब और 3,49,403 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद की थी।
19 मई को अंतिम चरण के चुनाव के साथ ही यह अभियान समाप्त हो गया। उसके बाद 10 दिन भी नहीं बीते थे कि फिर हादसा हो गया। इस बार मौतें अवैध तरीके से बनने वाली शराब से न होकर सरकारी ठेके से खरीदी जा रही शराब से हुई है जो और भी गंभीर है।