बाराबंकी की देवा कोतवाली इलाके में पलटी बस में करीब 50 लोग सवार थे। जबकि यह बस केवल 32 सीटर क्षमता की है। आखिर यह अनदेखी कैसे हुई यह भी बड़ा सवाल है, बस को तीन दिन का विशेष परमिट जारी किया गया था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बस की रफ्तार तेज थी। जब बस के सामने अचानक बाइक आई तो चालक संतुलन खो बैठा। अचानक ब्रेक लगी तो बस पलट गई। दरअसल, शिक्षा विभाग को बच्चों को शैक्षिक भ्रमण पर भेजने के लिए निजी बस का प्रयोग ही करता है।
सिद्धौर कस्बे के शहाबुद्दीन की इस बस को विभाग ने बुक किया था। एआरटीओ अकिंता के अनुसार बस के संचालन का परमिट 18 अगस्त तक वैध है। जबकि फिटनेस 17 जुलाई तक व बीमा 30 जुलाई तक है।
बस को दो से चार अप्रैल तक का विशेष परमिट दिया गया था। लेकिन सवाल यह उठता है कि 32 सीटों वाली बस में 50 सवारी कैसे बैठाई गईं। विभाग के ही अनुसार भ्रमण पर 42 बच्चे गए थे। छह शिक्षक थे। चालक व परिचालक मिलाकर 50 लोग थे।
गम और गुस्से के बीच सेवाभाव का अद्भुत नजारा
सड़क हादसे में बच्चों की मौत के बाद लोगों में जहां गुस्सा था वहीं लोग घटना से दुखी भी थे। इन सबके बीच जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सेवा भाव का जो अद्भूत नजारा दिखा सुखद रहा। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार सूचना मिलने के 15 मिनट के अंदर देवा सीएचसी पहुंच बचाव कार्य की कमान संभाल ली।
वहीं से फोन पर अफसरों को निर्देश देते रहे कि किसे कहां पर रहना है और क्या करना है। इसके बाद वह एसपी दिनेश कुमार के साथ इमरजेंसी में भी पहुंचे। डॉक्टरों से उपचार की जानकारी ली और कहा कि बच्चों को बेहतर उपचार की सुविधा मुहैया कराई जाए।
हादसे की जानकारी मिलते ही इमरजेंसी को अलर्ट कर दिया गया। हादसे में घायल कक्षा छह के छात्र गुलशन, रागिनी और छोटू ने बताया कि वह चिड़ियाघर देखने के लिए गए थे। देवा के सलारपुर के पास बस पलट गई। हम लोग कुछ समझ ही नहीं पाए कि क्या हो गया। वहीं अजय का हाथ कट जाने के कारण लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया।
15 मिनट में ही पहुंच गईं एंबुलेंस
सीएमओ डॉ. अवधेश यादव ने बताया कि डीएम की सूचना के बाद इमरजेंसी और सीएचसी देवा के अधीक्षक डॉ. राधेश्याम गौड को अलर्ट कर दिया गया। 15 मिनट के बीच छह एंबुलेंस मौके पर रवाना कर दी गई। चिकित्सकों की टीम ने प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को जिला अस्पताल भेजना शुरू कर दिया। सीएमएस ब्रजेश कुमार और सीएमएस प्रदीप कुमार को हादसे की जानकारी पर पहले ही अलर्ट कर दिया था।
एडीएम को सीएचसी तो एएसपी को इमरजेंसी का जिम्मा
जिलाधिकारी ने एडीएम अरुण कुमार सिंह और एसडीएम सदर विजय कुमार त्रिवेदी को सीएचसी देवा भेजा तो एएसपी अखिलेश नरायन सिंह को इमरजेंसी में मुस्तैद रहने के लिए कहा। तहसीलदार सदर शरद कुमार को भी इमरजेंसी में ही तैनात किया। सभी अधिकारी पूरी जिम्मेदारी के साथ मुस्तैदी से डटे रहे। एडीएम और एसडीएम एक-एक कर सीएचसी से घायलों को एंबुलेंस से इमरजेंसी भिजवा रहे थे, वहीं एएसपी घायल बच्चों को शहर कोतवाल अजय त्रिपाठी व अन्य पुलिस कर्मियों के साथ एंबुलेंस से उतारकर इमरजेंसी में पहुंचाते नजर आए।
जनप्रतिनिधियों का भी जमावड़ा
घटना की सूचना मिलते ही मंत्री सतीश चंद्र शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत, विधायक साकेंद्र वर्मा, सदर विधायक धर्मराज यादव उर्फ सुरेश यादव, पूर्व मंत्री अरविंद कुमार सिंह गोप, जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत, पूर्व सांसद पीएल पुनिया, तनुज पुनिया, शरद अवस्थी, राजेश उर्फ राजू, शशांक कुशमेश, रामनाथ मौर्या, शिक्षक नेता अलका और रंजना भी मौके पर पहुंचे।हादसे में घायलों का हाल जाना। अधिकारियों से राहत व बचाव कार्य के बारे में भी जानकारी ली।
जिला अस्पताल पहुंचीं महानिदेशक
हादसे में परिषदीय विद्यालय की छात्राओं की मौत की सूचना पर प्रदेश की महानिदेशक शिक्षा कंचना वर्मा ने सहां भर्ती तीन बच्चों का हाल लिया। उन्हाेंने शासन के उच्चाधिकारियों को पूरे हालात से अवगत कराया। बीएसए संतोष पांडेय ने उन्हे बताया कि बच्चे दोपहर में चिड़ि़याझार पहुंच गए थे। यहां से खाना लेकर गए थे। सभी ने लखनऊ में लंच करने के बाद ही प्रस्थान किया था। उधर, हादसे की सूचना पाकर महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष अलका गौतम व प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारी अभिषेक सिंह पहुंच गए।
आपको बता दें कि मंगलवार को सूरतगंज ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय हरक्का से 40 बच्चों को शैक्षिक भ्रमण के लिए एक निजी बस से लखनऊ के चिड़ियाघर ले जाया गया था। बच्चों की देखरेख में छह अध्यापक भी गए थे। शाम करीब साढे़ चार बजे बस बच्चों को लेकर सूरतगंज लौट रही थी।
शाम करीब पौने छह बजे देवा फतेहपुर मार्ग सलारपुर गांव के पास आदर्श कॉलेज के सामने बस के सामने अचानक एक बाइक सवार आ गया। बस ने बाइक को टक्कर मारी और लहराते हुए सड़क के करीब 60 फिट तक घिसटती चली गई और फिर पलट गई। हादसा होते ही घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई।
बस में सवार मोहम्मदपुर खाला थाना इलाके के मदरहा गांव की कामिनी (14), हिमांशी (14), शुभी (14) और बस मालिक के पुत्र असंद्रा के सिद्धौर कस्बा निवासी सूफियान (38) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह शिक्षकों समेत 15 अन्य घायल हुए। अजय और प्रदीप को नाजुक हालत में जिला अस्पताल से केजीएमयू रेफर किया गया है। सूचना पर डीएम सत्येंद्र कुमार व एसपी दिनेश कुमार सिंह समेत पूरा प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया।