बैंक सखियों का विस्तार धीमा है
इससे साफ है कि 21 माह में बैंक मित्रों की संख्या करीब 56% बढ़ी, वहीं बैंक सखियों में वृद्धि बेहद सीमित करीब 3% रही। वित्तीय समावेशन के लिहाज से देखें तो बैंक मित्रों का नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ा आधार बन चुका है। जबकि, बैंक सखियों का विस्तार धीमा है।
बैंकिंग आंकड़ों के मुताबिक मार्च-24 से मार्च-25 के बीच बैंक मित्रों की संख्या में 123442 का इजाफा हुआ है। वहीं, मार्च से दिसंबर-25 के बीच उनकी संख्या 9958 बढ़ी है। बीसी सखियों की संख्या पर नजर डालें तो मार्च-24 से मार्च-25 के बीच महज 1023 की वृद्धि हुई है। इसके बाद नौ माह में उनकी संख्या में सिर्फ 202 का इजाफा हुआ। बैंक मित्र तो प्रत्येक 660 मीटर पर मौजूद हैं तो दूसरी तरफ बैंक सखियां 6.10 किलोमीटर पर मिलेंगी।
डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग तकनीक का सीमित ज्ञान बड़ी बाधा
कुल बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट नेटवर्क में महिलाओं की हिस्सेदारी 10% से भी कम है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के चार बड़े बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक बीसी सखियों की संख्या बढ़ाने के लिए बैंकों का पूरा जोर है लेकिन पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की कम संख्या कम होने के कई कारण हैं।
ग्रामीण महिलाओं में डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग तकनीक का सीमित ज्ञान बड़ी बाधा है। कई महिलाओं के पास पूंजी, संसाधन या परिवार का समर्थन नहीं होता। बैंक सखी बनने के लिए स्वयं सहायता समूह से जुड़ाव और प्रशिक्षण जरूरी होता है जिससे चयन का दायरा सीमित हो जाता है। उनका सुझाव है कि यदि प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता और आय सुरक्षा पर जोर दिया जाए तो बैंक सखियों का नेटवर्क भी बैंक मित्रों की तरह तेजी से बढ़ सकता है।