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10 करोड़ के गबन का आरोपी बैंक मैनेजर गिरफ्तार

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लखनऊ। अंबेडकर पार्क स्मारक समिति के 10 करोड़ रुपये के गबन के मामले में आरोपी व बैंक ऑफ बड़ौदा की रोशनाबाद शाखा के तत्कालीन मैनेजर नागेंद्र प्रसाद पाल को शनिवार को गोमतीनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
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अंबेडकर पार्क स्मारक समिति के मुख्य प्रबंधक और एलडीए सचिव पवन गंगवार ने 16 सितंबर 2021 को बैंक ऑफ बड़ौदा की रोशनाबाद शाखा के प्रबंधक नागेंद्र पाल, कृष्ण मोहन श्रीवास्तव व अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ गोमतीनगर थाने में धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि जाली दस्तावेजों और शाखा प्रबंधक नागेंद्र प्रसाद पाल की मिलीभगत से समिति की धनराशि व्यक्तिगत खाते में जमा करा दी गई है। समिति ने तीन साल एक महीने की एफडी कराने के लिए 31 मार्च को बैंक की रोशनबाद शाखा में 48 करोड़ रुपये जमा कराए थे। बैंक ने 28 मई 2021 तक सिर्फ 38 करोड़ रुपये की एफडी के ही प्रपत्र समिति को उपलब्ध कराए थे।
छानबीन में मामला पकड़ में आने पर मैनेजर ने 38 करोड़ रुपये बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में वापस मंगा लिए गए थे। जबकि दस करोड़ रुपये आज तक बरामद नहीं हो सके। आरोपियों ने समिति के बैंक खाते से राइट पे नामक फर्जी कंपनी में रकम ट्रांसफर कराई थी। गोमतीनगर इंस्पेक्टर केशव कुमार तिवारी ने बताया कि बैंक के तत्कालीन मैनेजर नागेंद्र प्रसाद पाल को शनिवार को गोमतीनगर विस्तार के ओवरब्रिज के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। उसे कोर्ट में पेश करके जेल भेजा गया है।
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सात आरोपियों की हो चुकी गिरफ्तारी
लखनऊ। एसीपी गोमतीनगर श्वेता श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले में अंबेडकर पार्क स्मारक समिति के लेखाकार व विशालखंड गोमतीनगर निवासी संजय सिंह, चंद्रलोक कॉलोनी अलीगंज निवासी रविकांत पांडेय उर्फ मुकेश, केरल के कैलूर अर्नाकुलम निवासी संदीप पुथनमाडम, कर्नाटक, मैसूर के हैबबाल निवासी दीपक यादवा, हरदोई के महेशपुर निवासी शैलेंद्र सिंह उर्फ शैलू, देवरिया के रामपुर कारखाना निवासी आकाश कार्तिकेय और गोंडा के स्टेशन रोड निवासी कृष्णमोहन श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
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नोट.. जगह कम हो तो ये इनसेट कहा सकते हैं
ये था मामला
एलडीए ने अंबेडकर पार्क स्मारक समिति के लगभग 6500 संविदा कर्मियों के ईपीएफ के 48 करोड़ रुपये की रकम बैंक ऑफ बड़ौदा में जमा कराई गई थी। इससे छोटी-छोटी रकम के फिक्स डिपॉजिट होने थे। बैंक ऑफ बड़ौदा ने फर्जी तरीके से एक व्यक्ति को नामित करके नादान महल रोड स्थित बैंक की छोटी शाखा में इस रकम का निवेश कर दिया, जिसे बाद में सांठगांठ से प्राइवेट बैंक में ट्र्रांसफर कर दिया गया था। एलडीए को इसकी भनक लगते ही 38 करोड़ रुपये बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में वापस मंगा लिए गए थे। ये घोटाला स्मारक समिति के सहायक प्रबंधक (वित्त) देवेंद्र मणि उपाध्याय ने बैंक ऑफ बड़ौदा के अफसरों की मिलीभगत से किया था। इसके कागजातों पर समिति के मुख्य प्रबंधक और सहायक प्रबंधक वित्त के संयुक्त हस्ताक्षर थे। मगर पत्रों एवं हस्ताक्षर का सत्यापन नहीं कराया गया था। इस रकम के 10 करोड़ रुपये आज तक रिकवर नहीं हो सके हैं। मामले में एलडीए उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी ने समिति के सहायक प्रबंधक (वित्त) देवेंद्र मणि उपाध्याय को निलंबित कर दिया था। देवेंद्र अभी निलंबित ही चल रहे हैं।
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