गिरफ्तार जालसाजों ने पूछताछ में बताया कि वे इस तरह के संस्थाओं से करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर चुके हैं। इसके बदले में बैंककर्मियों को हर एक करोड़ रुपये पर 6 से 7 हजार रुपये का कमीशन मिलता है। इसी लालच में पूर्व में भी चेक क्लोनिंग व एफडीआर का फर्जी खाता खुलवाकर भुगतान कराया जा चुका है।
जालसाजों के मोबाइल फोन की जांच में कई शासन के पत्र व रकम के बारे में जानकारी मिली। चैटिंग से पता चला कि फर्जीवाड़े से हासिल की गई धनराशि से जालसाजों ने बीएमडब्ल्यू और ऑडी कार खरीदी है।