गोमती के तटों पर कुड़िया घाट से लेकर पिपरा घाट के पहले तक सघन पौधारोपण लखनऊ विकास प्राधिकरण ने प्रतिबंधित कर दिया है।
यहां पर गोमती रिवर फ्रंट डवलपमेंट के लिए कराए गए हाइड्रोलिक सर्वे की रिपोर्ट में इस क्षेत्र के लिए केवल आर्किटेक्ट द्वारा प्रस्तावित पौधारोपण को ही अनुमन्य किया गया है।
ऐसे में कई संस्थाएं जो गोमती तट पर इस मानसून के दौरान पौधारोपण करने की इच्छुक थी, उनको एलडीए की ओर से न कर दी गई है।
गोमती के तटों पर मानसून के दौरान कई संस्थाएं पौधारोपण करती हैं।
पराग डेयरी बांध के नीचे से लेकर भैंसाकुंड तक सालों पहले सघन पौधारोपण करवाया गया था। इस पौधारोपण ने अब छोटे जंगल का रूप ले लिया है।
इसी तरह से कई संस्थाओं ने इस वर्ष भी बड़े पौधारोपण अभियान के लिए प्राधिकरण के समक्ष प्रस्ताव रखा है। मगर इन सारे प्रस्तावों को एलडीए अब खारिज कर रहा है।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अष्टभुजा प्रसाद तिवारी ने बताया कि, हमें आईआईटी रुड़की की जो संस्तुतियां प्राप्त हुई हैं, उनके मुताबिक बहुत अधिक घना पौधारोपण रिवर फ्रंट डवलपमेंट के लिए ठीक नहीं है।
इससे गोमती की निर्बाध धारा भी प्रभावित होगी। इसलिए हम इस बार कुड़ियाघाट से पिपरा घाट से पहले तक पौधारोपण की इजाजत नहीं देंगे।
जिनको भी पौधारोपण करना हो, वे पिपरा घाट से आगे कर सकते हैं। या फिर कुड़ियाघाट के पहले कर लें।
एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
प्राधिकरण को इस साल राजधानी में एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। एलडीए को अपनी विभिन्न योजनाओं और पार्कों में ये पौधे लगाने होंगे।
मगर एलडीए का पौधारोपण अभियान फिलहाल फिसड्डी ही नजर आ रहा है। दूसरी ओर संस्थाओं को इजाजत नहीं मिल रही है।
केवल डॉ. राममनोहर लोहिया पार्क और जनेश्वर मिश्र पार्क की प्रस्तावित साइट में ही कुछ पौधारोपण की योजना है।