लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल में करीब 45 दिन बाद शुक्रवार को सीटी स्कैन की जांच शुरू हो पाई। निजी कंपनी की लापरवाही से करीब एक हजार मरीजों की जांच टल गई। भर्ती मरीजों को जांच के लिए दूसरे केंद्रों की दौड़ लगानी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि नियमानुसार तय समय में मशीन दुरुस्त नहीं की गई। लिहाजा कंपनी पर जुर्माना लगाया जाएगा।
प्रदेश में उपकरणों की मरम्मत करने का काम सायरेक्स कंपनी के पास है। बलरामपुर अस्पताल में छह अगस्त को सीटी स्कैन मशीन खराब हुई थी। हर दिन अस्पताल में करीब 25-30 मरीजों की जांच इससे होती थी। अस्पताल प्रशासन ने सायरेक्स कंपनी को शिकायत दर्ज कराने के साथ ही पत्र भेजा था। कंपनी से आए इंजीनियरों ने जांच के बाद बताया कि मशीन में लगने वाली ट्यूब खराब है।
नियम कहता है कि कंपनी को अस्पतालों की किसी भी मशीन को तीन दिन या अधिक से अधिक एक सप्ताह में बनाना होता है। कंपनी करीब 40 दिन बाद पार्ट्स लेकर आई और मरम्मत का काम शुरू किया। इसी बीच इंजीनियरों ने अर्थिंग ठीक नहीं होने की बात की। इससे मशीन को दुरुस्त करने का काम तीन दिन और टला।
अस्पताल निदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने बताया कि बृहस्पतिवार देर रात मशीन दुरुस्त की जा सकी। शुक्रवार को मशीन से मरीजों का सीटी स्कैन किया गया। सायरेक्स कंपनी के मैनेजर अजय वर्मा का कहना है कि पार्ट्स नहीं मिलने से मशीन बनने में देरी लगी।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि तय नियमों के अनुसार मशीन को अधिकतम सात दिन में दुरुस्त करना था। 45 दिन मेंं करीब एक हजार मरीजों की जांच टली है। स्वास्थ्य महानिदेशालय के अफसरों का कहना है कंपनी पर जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माने की रकम कितनी होगी, इसकी गणना कराई जा रही है। अनुमान है कि जुर्माना बीस लाख रुपये से अधिक का होगा।