मुख्य न्यायाधीश बनकर 10 लाख रुपये की मांग करने वाले जालसाज रंजन कुमार मिश्र की जमानत अर्जी को एडीजे हरेंद्र बहादुर सिंह ने खारिज कर दिया।
कोर्ट में सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि 16 अगस्त 2019 को हाइकोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार मानवेन्द्र सिंह ने डीजीपी को पत्र लिखकर बताया था कि जेटीआरआई के अतिरिक्त निदेशक संतोष राय के मोबाइल पर किसी ने फोन किया और खुद को प्रदेश का मुख्य न्यायाधीश बताते हुए उनका और निदेशक सरोज यादव का हालचाल पूछा। उस व्यक्ति ने संतोष राय से किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने के लिए कहा जो नेट बैंकिंग करना जानता हो। इस पर अतिरिक्त निदेशक ने अपने एक मित्र जयंत सिंह तोमर के विषय मे बताया। इस पर मुख्य न्यायाधीश बनकर बात करने वाले व्यक्ति ने अतिरिक्त निदेशक को तोमर से बात कराने के लिए कहा।
बताया गया कि जब जयंत सिंह तोमर ने उस व्यक्ति के नम्बर पर बात की तो उसने पटना में किसी के खाते में 10 लाख रुपये भेजने के लिए कहा। इसके बाद अतिरिक्त निदेशक को शक हुआ तो उन्होंने इसकी जानकर उच्चाधिकारियों को दी। इस पर मामले की रिपोर्ट गोमतीनगर में दर्ज हुई। पुलिस को विवेचना के दौरान पता चला कि आरोपी रंजन कुमार मिश्र ने खुद को मुख्य न्यायाधीश बताकर 10 लाख रुपये ऐंठने का प्रयास किया था।
शादी का झांसा दे दुराचार करने में नहीं मिली जमानत
खुद को मैनेजर बताकर, शादी का झांसा देकर दुराचार करने और वीडियो वायरल करने की धमकी देने के आरोपी ट्रक चालक गुरमीत सिंह की जमानत अर्जी एडीजे मुकेश कुमार सिंह ने खारिज कर दी
कोर्ट में सरकारी वकील ज्वाला प्रसाद शर्मा ने तर्क दिया कि वादिनी ने मड़ियांव में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी गुरमीत सिंह ने खुद को गुजरात की कम्पनी में मैनेजर बताकर वादिनी से दोस्ती की और शादी का प्रस्ताव दिया।कहा गया कि आरोपी कुछ समय पहले वादिनी के किराये के मकान में आया और दबाव बनाकर जबरन संबंध बनाए जिससे वादिनी बेहोश हो गई और आरोपी ने तस्वीरें खींच लीं। बाद में पता चला कि आरोपी मैनेजर नहीं था बल्कि ट्रक चालक है जिसका काम लड़कियों के साथ धोखाधड़ी करके दुष्कर्म करना है। बताया गया कि 3 जुलाई 2020 को भी आरोपी ने दुष्कर्म किया और धमकी दी कि किसी को बताने पर वादिनी का वीडियो सोशल मीडिया पर डाल देगा।