नाव से बेत की लकड़ी की तस्करी कर ले जाते तस्कर।
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प्राकृतिक विविधताओं के लिए पहचाने जाने वाले कतर्नियाघाट वन्यजीव क्षेत्र में विचरण करते दुर्लभ वन्यजीव व बेशकीमती जड़ी-बूटियां इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। इस संपदा पर तस्करों की नजर है। जड़ी-बूटियों के साथ ही कतर्नियाघाट में बेशकीमती लकड़ियों व हजारों एकड़ में लगे बेशकीमती बेंत की तस्करी की जा रही है।
कतर्नियाघाट में लगे बेंत की लकड़ी को काटकर तस्कर जंगल से गुजरने वाले नदी-नालों के जरिए लखीमपुर ले जा रहे हैं। जंगल में नदी के रास्ते जारी बेंत की तस्करी के दो वीडियो भी सामने आए हैं। जिसमें तस्कर दो नावों पर बेंत की लकड़ी काट कर नदी के रास्ते जाते दिख रहे हैं। हालांकि अमर उजाला इन वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। कतर्नियाघाट वन रेंज को कोर जोन घोषित किया गया है और यहां बिना अनुमति प्रवेश प्रतिबंधित है। लेकिन तस्कर धड़ल्ले से तस्करी को अंजाम दे रहे हैं। कुछ ग्रामीण वन कर्मियों की संलिप्तता की भी चर्चा कर रहे हैं।
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कतर्नियाघाट वन रेंज में हजारों एकड़ में फैले बेंत से महंगे फर्नीचर बनाए जाते हैं। बड़े-बड़े होटलों व घरों में लोग बेंत से बनीं कुर्सियां व मेज रखते हैं, जो आकर्षण का केंद्र रहते हैं।
कतर्नियाघाट वन रेंज के रेंजर आशीष गौड़ का कहना है कि जंगल में बेंत की तस्करी नहीं हो रही है। वीडियो पूर्व में हुई कार्रवाई का हो सकता है। पूर्व में दो नावों पर लदी बेंत की लकड़ी को बरामद किया गया था। तस्करों के खिलाफ सघन जांच की जाती है।