रात में शहर के कई जगहों पर हुई आगजनी।
- फोटो : अमर उजाला।
महराजगंज की घटना का विरोध देखते ही देखते पूरे जिले में फैल गया। सड़क जाम करने के साथ ही कुछ जगहों पर आगजनी भी हुई। इससे देर रात तक तनाव रहा। वहीं, शहर, फखरपुर, तेजवापुर, रिसिया ब्लॉक, नानपारा व इटहा में पूजा समितियों ने प्रतिमाओं का विसर्जन रोक दिया।
रामगोपाल की मौत के बाद मेडिकल कॉलेज में भी प्रदर्शन व नारेबाजी शुरू हो गई। आक्रोशित लोग शव लेकर मेडिकल कॉलेज के बाहर पहुंचे और सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। यही नहीं, मेडिकल कालेज के पास से गुजर रहीं प्रतिमाएं भी रोक दी गईं। देर रात महसी विधायक सुरेश्वर सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को किसी तरह से मनाकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया। इसके बाद लोगों का जमावड़ा पीएम हाउस पर हो गया। वहां भी देर रात तक नारेबाजी होती रही। पुलिस के खिलाफ स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन भी किया।
एसपी ने संभाला मोर्चा
मामला बढ़ने पर एसपी वृंदा शुक्ला भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचीं और स्थिति को संभालने का प्रयास शुरू किया। उन्होंने बताया कि मौके पर दो प्लाटून पीएसी तैनात की गई है। छह थानों की पुलिस भी मौजूद है। स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रकरण की जांच की जा रही है। इसमें शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। अगर स्थानीय पुलिस की लापरवाही भी सामने आई तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। हालात पर नियंत्रण के लिए पुलिस पूरी रात सक्रिय है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापा भी मारा जा रहा है।
घटना के बाद सांप्रदायिक तनाव।
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महराजगंज की घटना के बाद सबसे ज्यादा आरोप पुलिस व प्रशासन पर लगे। घटना के बाद लोगों ने आरोप लगाया कि गाने को लेकर जब दूसरे समुदाय की ओर से गाली गलौज की गई तो पुलिस व प्रशासन के जिम्मेदार मूकदर्शक बने रहे। आरोप है कि मौके पर एसओ मौजूद भी नहीं रहे। आरोप है कि जब पथराव हुआ और पूजा समितियों के लोगों ने प्रदर्शन किया तो पुलिस ने उनपर ही लाठी चार्ज कर दिया, जिससे भगदड़ मच गई और दूसरे समुदाय के लोग रामगोपाल को घर में उठा ले गए, जहां उनके साथ बर्बरता के बाद गोली मार दी गई।
तो हत्या में भरुआ कारतूस का प्रयोग
घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रामगोपाल के शरीर पर छर्रे के 20 से अधिक निशान थे। ऐसे में आशंका है कि उन्हें पांच से छह भरुआ कारतूस से गोली मारी गई। इससे छर्रे बिखरकर पूरे सीने में धंस गए हैं।