लखनऊ। गैंगस्टर जीवा हत्याकांड का असल किरदार बदन सिंह बद्दो सामने आ गया है। पुलिस ने बद्दो को हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता होने का दावा किया है।
लेकिन, तमाम सवाल अभी भी बरकरार हैं। जिनके जवाब अब तक नहीं मिले हैं, जिससे हत्याकांड की पूरी साजिश की कड़ियां नहीं जुड़ पा रही हैं।
कोर्ट में शूटर विजय यादव के खिलाफ दाखिल चार्जशीट से मुख्य साजिशकर्ता को एसआईटी ने बेनकाब किया है। लेकिन अब तक ये नहीं पता चल सका है कि जिस असलम ने बद्दो से शूटर की मुलाकात कराई थी वह कौन है? कहां का रहने वाला है? नेपाल में वह विजय यादव के संपर्क में कैसे आया?
यही नहीं, विजय ने गिरफ्तारी के बाद कहा था कि उससे असलम ने कहा था कि लखनऊ जेल में उसका भाई बंद है। जिसका अपमान जीवा ने किया है। उसका बदला लेने के लिए हत्या करानी है।
सवाल है कि जब वह बद्दो से मिल चुका था तो उसने पूछताछ में इसका जिक्र क्यों नहीं किया? क्या ये साजिश थी या फिर बद्दो पहचान छिपाकर उससे मिला था? ये भी स्पष्ट नहीं हो सका है।
हालांकि अफसरों का कहना है कि विवेचना जारी है। जैसे-जैसे अज्ञात आरोपी गिरफ्त में आएंगे साजिश की कड़ियां जुड़ती जाएंगी। जिससे अनसुलझे सवालों के जवाब भी मिलेंगे।
आखिर लखनऊ में बद्दो का गुर्गा कौन? जिसने दी थी रिवाॅल्वर
एसआईटी के मुताबिक, सात जून की सुबह विजय लखनऊ पहुंचा था। वह रोडवेज बस से ही यहां आया था। दावा है कि बद्दो के एक गुर्गे ने यहीं पर उसको रिवाॅल्वर दी। कोर्ट तक भी पहुंचाया। पर, एसआईटी इस गुर्गे का नाम पता नहीं कर सकी है। सवाल है कि आखिर बद्दो का ये गुर्गा कौन है? क्या करता है और कहां रहता है? ये सवाल भी अधूरे पड़े हैं।
न शूटर था विजय..न शातिर अपराधी..आखिर उसको ही क्यों दी सुपारी
जौनपुर निवासी विजय यादव ने जीवा की हत्या की थी। विजय पर इसके पहले लॉकडाउन उल्लंघन और एक किशोरी को बहलाफुसलाकर ले जाने के केस दर्ज थे। बड़ा आपराधिक इतिहास नहीं था। न ही इसके पहले कोई हत्या की थी। न ही वह कोई शातिर शूटर था। ऐसे में सवाल उठता है कि इतना बड़ा बदमाश बद्दो व उसके गुर्गों ने विजय को ही क्यों सुपारी दी? ये बात भी गले नहीं उतर रही है।