लखनऊ। लखनऊ के कुकरैल स्थित घड़ियाल पुनर्वास केंद्र में अप्रैल में हैचिंग चैंबर में रखे घड़ियाल के अंडों से बच्चे बाहर आ गए हैं। घड़ियालों के परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ने से वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी काफी खुश हैं।
मुख्य वन संरक्षक टी. रंगा राजू ने बताया कि मादा घड़ियाल मार्च और अप्रैल में अंडे देती है। इन्हें 30 से 35 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान पर रेत में दबाकर रखा जाता है। घड़ियाल के बच्चों के जन्म में 60 से 62 दिन का वक्त लगता है। घड़ियाल के बच्चों की आयु लगभग ढाई वर्ष और लंबाई सवा से डेढ़ मीटर होने के बाद उन्हें नदी में छोड़ दिया जाता है। माना जा रहा है कि विकास के बाद घड़ियाल के इन बच्चों को इन्हें गंगा या गंडक नदी में छोड़ा जा सकता है। घड़ियाल पुनर्वास केंद्र कुकरैल की स्थापना भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की मदद से साल 1975 में हुई थी।