सोमवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की विहिप नेताओं से मुलाकात पर तीखा बयान जारी करने वाले नगर विकास मंत्री आजम खां मंगलवार को कैबिनेट की बैठक से नदारद रहे।
लेकिन उन्होंने कहा कि वह न तो नाराज हैं और न गुस्सा। कल की बात थी, कल हुई। नेताजी या मुख्यमंत्री से मेरे ऐसे रिश्ते हैं जहां टकराव की कोई गुंजाइश नहीं है।
खबरनवीसों से मुखातिब आजम खां ने कैबिनेट की बैठकों में शामिल न होने के सवाल पर कहा, 'मेरे पास बड़ी जिम्मेदारी है। आज भी दो मीटिंग लगी हुई थी। उन्हें छोड़कर कैबिनेट की बैठक में कैसे जाता? बीती रात ढाई बजे सोया था। हर पत्रावली को खुद पढ़ता हूं। स्पेलिंग मिस्टेक तक ठीक करता हूं। खुद नोटिंग करता हूं। मेरे लिए दिन-रात कम पड़ जाते हैं।'
17 अगस्त को विहिप संरक्षक अशोक सिंघल से मुलायम सिंह की मुलाकात को लेकर सोमवार के बयान पर भी उन्होंने सीधे तौर पर प्रतिक्रिया से परहेज किया।
आजम ने कहा, 'इस मुलाकात के सिलसिले में मेरी नेताजी या मुख्यमंत्री से टेलीफोन पर भी बात नहीं हुई। उनसे न कोई शिकायत है और न ही कोई विरोध। जैसे रिश्ते नेताजी और सीएम से हैं, वहां टकराव की गुंजाइश नहीं है।'
'जब टकराव हो सकता था, तब नहीं हुआ। लेकिन, हम हालात से अनभिज्ञ नहीं हैं। सुझाव देना, हालात को महसूस करना और महसूस कराना हमारी जिम्मेदारी है। मैं इसे निभा रहा हूं।'
84 कोसी परिक्रमा को बैसाखी की तलाश
आजम खां ने कहा, 84 कोसी परिक्रमा से उन लोगों को किरण की तलाश है जो अंधेरे में चले गए थे। व्हील चेयर पर पहुंचे जिन लोगों की तलाश मोदी ने भी नहीं की, वे चाहते हैं कि उन्हें बैसाखी मिल जाए। साधु संतों का काम धर्म प्रचार और मोहब्बत का पैगाम देना होना चाहिए। यदि वे असली साधु हैं तो हमारी दरख्वास्त है कि वे इस काम को करें।
सरकार का फैसला जायज
प्रदेश सरकार द्वारा 84 कोसी परिक्रमा पर पाबंदी लगाने के सवाल पर आजम खां ने कहा, हम नहीं चाहते कि विवाद हो, प्रदेश में सौहार्द बना रहना चाहिए। सरकार सेकुलर है, उसके फैसले राजनीतिक-धार्मिक आधार पर नहीं होते।
फैसले समाज की भलाई और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। सोमवार को योगी आदित्यनाथ जिस तरह झांसी जाने पर अड़े थे, माहौल खराब करने की कोशिश की गई, उससे लगता है कि 2014 के एजेंडे पर घेराबंदी शुरू हो गई है।