अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां ने मुसलमानों को एक बार फिर चेताया। उन्होंने कहा कि आप चौकन्ने न हुए तो इसके नतीजे बहुत खतरनाक होंगे। नतीजे ऐसे होंगे जिसे आप बर्दाश्त भी नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि मुल्क के हालात आपसे छुपे नहीं हैं। बहुत चौकन्ना होने की जरूरत है।
आज जिन जुमलों पर बहस हो रही है वे इस लायक नहीं हैं। बल्कि बहस तो इस बात पर होनी चाहिए कि किसी के सिर न काटे जाएं, दिल न दुखाया जाए, माहौल न खराब किया जाए, रोटी के लिए कोई भूख से न मरे, छोटी बच्चियों के साथ वहशीपन न हो।
हज यात्रियों की लाटरी निकालने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में आजम ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम ने झाड़ू तो पकड़ा दी लेकिन मुल्क फिर भी साफ नहीं हो पाया।
जमीन की सफाई के लिए माहौल का साफ होना जरूरी
इस दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश भी मौजूद थे
- फोटो : amar ujala
जमीन की सफाई के लिए माहौल की सफाई होना जरूरी है। तन की सफाई के लिए दिल व दिमाग की सफाई जरूरी है। आजम ने कहा कि हालात को महसूस करिए।
आपको सिर्फ हज के कुर्रे के लिए नहीं बुलाया है, हमें आपसे मिलकर अपनी बात पहुंचानी है।
उन्होंने कहा कि अभी तो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय का दर्जा छिना है। जामिया विश्वविद्यालय भी हवा में उड़ गया। पांच साल पहले देश के प्रधानमंत्री को मैंने एएमयू को लेकर एक पत्र भेजा था। यदि उस समय केंद्र सरकार चौकन्नी होती तो कानून बनाकर इस मसले को हल कर लेती।
उन्होंने एक मस्जिद के इमाम का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें अपनी डिग्रियां वापस कर देनी चाहिए। हम यह कैसे बर्दाश्त कर लें कि मस्जिद का इमाम व मदरसे में दीन पढ़ाने वाला वह शख्स हो, जिसने इम्तहान ही न दिया हो। उन्हें अपने अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए। इस्तीफा दे देना चाहिए।
जौहर विवि का अल्पसंख्यक दर्जा छिनने का डर
कार्यक्रम का एक दृश्य
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आजम खां ने कहा कि हमने बड़ी मेहनत से अली जौहर विश्वविद्यालय बनाया है। लेकिन हमें भी खतरे की घंटी का अहसास हो रहा है। यह राज्य विश्वविद्यालय है। इसका कानून सूबे की विधानसभा में पास हुआ है। इसलिए ऐसा कभी मत करना की सूबे की विधानसभा ऐसे हाथों में चली जाए, जिससे तुम्हारी तालीम व कलम दोनों खतरे में पड़ जाए।
हम दो के लिए दुआ करिए हमारे मामलात बढ़िया बने रहें...
आजम ने मुख्यमंत्री की ओर देखते हुए कहा कि हम दोनों के लिए दुआ जरूर करिए कि हमारे मामलात बढ़िया बने रहें।
कुछ लोग हमारे मामलात खराब करने के लिए कारीगरी दिखाते रहते हैं। हम चाहते हैं कि आप मजबूत गाड़ी के पहियों की तरह इस सूबे के चलाएं। इस मुल्क को सेकुलरिज्म की पहचान इस सूबे से मिले।
इससे पहले मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि हज करने के बाद हमारे किरदार में भी बदलाव आना चाहिए। जब हम अल्लाह के करीब होते हैं तो झगड़े नहीं होते हैं। उन्होंने आजम खां के लिए कहा कि उन्हें वजीर के रूप में नहीं लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में जो काम किया है वह काबिले तारीफ है।