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किसके लिए आजम ने मांगी उम्रकैद या फांसी?

Sat, 28 Jun 2014 11:07 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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संसदीय कार्यमंत्री ने सिंथेटिक दूध में मिलावट पर चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी बख्शे नहीं जाने चाहिए।
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गौरतलब है कि शुक्रवार को विधानसभा में मिलावटी दूध पर बहस हो रही थी जिसे एक बड़ा अपराध मानते हुए आजम ने मिलावट खोरों के लिए कड़ी सजा की मांग की। आजम ने कहा कि पिछले सत्र में भी यह मामला उठा था।

उन्होंने अपने एक जज मित्र का हवाला देते हुए वाकया सुनाया कि अदालत में जब एक केस आया तो नमूने की जो जांच रिपोर्ट पेश की गई उसमें दूध की एक बूंद भी न होने का जिक्र था। इसके बाद जज साहब के पास कोई चारा नहीं बचा। उन्होंने जमानत नहीं दी और उसे हाईकोर्ट जाना पड़ा।
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कहा कि पिछले साल सदन में जब इस मामले पर चर्चा हो रही थी तो चीन में इससे संबंधित दो वाकये हुए थे। एक को चौराहे पर फांसी दे दी गई और दूसरे को उम्रकैद। ऐसी ही कड़ी सजा की जरूरत है।

केंद्र बनाए कड़े कानून

सरकार ने जांच के लिए एकत्र किए गए दूध के नमूनों में हानिकारक रसायन और डिटर्जेंट मिलने की बात स्वीकार करते हुए कहा है कि इस पर नियंत्रण के लिए केंद्र को कड़ा कानून बनाना चाहिए।

सरकार का कहना है कि सिंथेटिक दूध की बिक्री किसी एक राज्य की नहीं बल्कि राष्ट्रीय समस्या है। हम जानते हैं कि नौनिहालों से लेकर बूढ़ों तक जहर पिला रहे हैं।

इस धंधे में लिप्त लोगों को पकड़ भी रहे हैं और अदालत में भेज भी रहे हैं लेकिन सब जानते हैं कि ऐसे लोगों को कितनी सजा मिलती है?

यह बेहद गंभीर मामला है और इस जघन्य अपराध के लिए कड़े कानून की जरूरत है ताकि किसी को सजा मिलने के बाद दूसरा व्यक्ति ऐसा करने का साहस न कर सके।

मंत्री ने कहा कि अफसरों की कमी

बसपा के डॉ. धर्मपाल सिंह, कांग्रेस के मुकेश श्रीवास्तव तथा भाजपा के डॉ. अरुण कुमार, मनीष असीजा व सतीश महाना के एक सवाल के जवाब में पंचायती राज मंत्री कैलाश यादव ने बताया कि वर्ष 2013-14 में दूध के एकत्र किए नमूनों की जांच में 26 नमूनों में हानिकारक रसायन व डिटर्जेंट पाए गए।

सरकार ने यह भी माना कि इससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मंत्री ने इसकी रोकथाम के लिए प्रवर्तन, छापेमारी व नियमित निरीक्षण किए जाने की बात भी कही।

अनुपूरक सवालों के जरिये सदस्यों ने जानकारी चाही कि नमूनों की जांच में कौन-कौन से रसायन पाए गए? खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी, लाइजनिंग अफसर तथा प्रवर्तन अधिकारी की नियुक्तियां कब तक कर दी जाएंगी?

अधिनियम में सजा का क्या प्रावधान है? मंत्री ने कहा कि अफसरों की कमी है। लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजकर 334 अफसरों की मांग की गई है। वहां से चयन होने के बाद नियुक्तियां कर दी जाएंगी।
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10 लाख जुर्माना, आजीवन कारावास की सजा

पंचायती राज मंत्री ने जवाब दिया कि जिन नमूनों में मिलावट पाई गई है उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इस अपराध के लिए 10 लाख रुपये तक अर्थदंड और आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।

अभी तक 10 लोगों को कारावास तथा 348 पर अर्थदंड लगाया जा चुका है। सदस्य नमूनों में मिले रसायनों के बारे में सवाल उठाते रहे तो संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने कहा कि जवाब में साफ है कि डिटर्जेंट पाया गया है जो हानिकारक है। सरकार काम पकड़ने का है। सजा देना अदालत का काम है।

मनीष असीजा ने इसके खिलाफ अभियान चलाने की बात कहते हुए कहा कि क्या सरकार जांच के लिए मोबाइल लेबोरेट्रीयुक्त वैन की व्यवस्था करेगी? आजम ने कहा कि सारी बात उत्तर में आ गई है।

नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने अपनी वाकपटुता से जवाब को घुमा दिया। उन्होंने अपनी पार्टी के सदस्यों के साथ यह आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया कि पूरे प्रदेश में नौनिहालों से लेकर बूढ़ों तक जहर दिया जा रहा है। सरकार इस पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है।
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