सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. आजम खां को रिटर्न गिफ्ट देने की तैयारी कर ली है। गिफ्ट के रूप में आजम को रामपुर का मौलाना मुहम्मद अली जौहर शोध संस्थान दिया जा रहा है।
सरकार यह शोध संस्थान आजम खां के ट्रस्ट को देने जा रही है। इस सरकारी शोध संस्थान को प्रदेश सरकार लीज के जरिये नाम मात्र के किराये पर आजम के ट्रस्ट को देगी। सरकार ने गुरुवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है।
आजम खां 21 व 22 नवंबर को रामपुर में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन बहुत भव्य तरीके से मनाने जा रहे हैं। इससे एक दिन पहले प्रदेश सरकार ने आजम की इच्छा के अनुरूप उन्हें मौलाना अली जौहर शोध संस्थान देने का फैसला ले लिया है।
आजम खां काफी समय से इस शोध संस्थान को अपने ट्रस्ट में मिलाना चाहते थे। उन्होंने इसके कई बार प्रयास भी किये। लेकिन उनके प्रयास विफल हो गए। अब सरकार ने आजम को यह शोध संस्थान बतौर गिफ्ट देने का फैसला ले लिया है।
आजम को मिलेगी करोड़ों की बेशकीमती जमीन
इसके लिए सरकार ने आनन-फानन कैबिनेट प्रस्ताव तैयार करवाया और रामपुर में जश्न शुरू होने से एक दिन पहले कैबिनेट बाई-सर्कुलेशन यह निर्णय ले लिया। यह संस्थान सरकार आजम खां के ट्रस्ट को लीज पर देगी।
हालांकि संस्थान पर मालिकाना हक सरकार का रहेगा। इसके लिए ट्रस्ट को सरकार द्वारा तय लीज रेंट देना होगा। यह लीज कितने वर्षों के लिए होगी और किराया कितना होगा यह अभी तय होना बाकी है।
‘अमर उजाला’ ने 15 नवंबर को ‘आजम को सरकार रिटर्न गिफ्ट देने की तैयारी में’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर सरकार की इस मंशा का खुलासा कर दिया था।
दरअसल, आजम खां इस शोध संस्थान के जरिये अपने ट्रस्ट की गतिविधियां बढ़ाना चाहते हैं। इस संस्थान के मिलने से आजम को रामपुर में करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन व भवन भी मिल जायेगा। साथ ही जौहर विश्वविद्यालय को भी इस शोध संस्थान से काफी फायदा होगा।
अधिकारी जता चुके हैं असहमति
आजम इस शोध संस्थान को पहले भी अपने ट्रस्ट में मिलाने के लिए विभागीय अधिकारियों पर दबाव डाल रहे थे। लेकिन तत्कालीन प्रमुख सचिव ने इस संस्थान को देने पर असहमति जता दी थी। उन्होंने इसके लिए फाइल पर लंबी-चौड़ी आपत्ति लगा दी थी।
साथ ही सरकारी शोध संस्थान को निजी ट्रस्ट में देने से पहले कई सारे बिंदुओं पर कानूनी राय लेने के लिए फाइल न्याय विभाग भेज दी थी। जब ज्यादा दबाव पड़ा तो तत्कालीन प्रमुख सचिव लंबी छुट्टी पर चले गए। बाद में उन्होंने अपना तबादला ही करवा लिया था।
अधिकारी के फाइल पर टिप्पणी करने से आजम खासे नाराज थे। हालांकि सरकार ने अब कैबिनेट के जरिये आजम को यह संस्थान देने का फैसला कर लिया है।