अखिलेश सरकार के मंत्री आजम खां को जल निगम के अध्यक्ष पद से हटाये जाने हेतु इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में एक पीआईएल दायर हुई है।
याचिका के अनुसार उत्तर प्रदेश जल निगम उत्तर प्रदेश जल आपूर्ति एवं सीवरेज अधिनियम 1975 से नियंत्रित होता है।
इस अधिनियम की धारा 7(3) के अनुसार अध्यक्ष का पद लाभ का पद नहीं माना जाएगा और उसका निगम के किसी प्रबंधकीय कार्य पर कोई अधिकार नहीं होगा।
निगम के समस्त प्रबंधकीय कार्य प्रबंध निदेशक एवं अन्य अधिकारी करेंगे।
इस कानूनी प्रावधान के बावजूद 28 अगस्त 2012 को श्री खान के हस्ताक्षर से एक कार्यालय ज्ञाप जारी कर दिया गया जिसमे कहा गया कि सारे प्रबंधकीय कार्य अध्यक्ष द्वारा किये जायेंगे।
तब से श्री खान अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत सारे प्रशासनिक और वित्तीय कार्य कर रहे हैं।
अतः सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने आजम खान को इस पद से हटाये जाने और 28 अगस्त 2012 के आदेश को निरस्त किये जाने की मांग की है।
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