पूछताछ में डाटा फीडिंग करने वाले कर्मियों ने बताया है कि दाखिले के काउंसिलिंग में शामिल वेंडर एजेंसी के मुख्य कर्ताधर्ता कुलदीप की ओर से जो डाटा उपलब्ध कराया जाता था, उसकी एंट्री ही की जाती थी।
आयुष कॉलेजों के दाखिलों में हुई हेराफेरी की जांच कर रही एसटीएफ को कुलदीप ढूंढे़ नहीं मिल रहा है। उसकी तलाश में हर मुमकिन ठिकाने पर छापेमारी जारी है। जांच एजेंसी की टीमें दूसरे राज्यों में भी गई हैं। इसी बीच एसटीएफ ने शनिवार को कुलदीप की पत्नी व उसके रिश्तेदारों को भी मुख्यालय बुलाकर पूछताछ की और कुलदीप से मिलने-जुलने वालों के बारे में जानकारी हासिल की।
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पूछताछ में डाटा फीडिंग करने वाले कर्मियों ने बताया है कि दाखिले के काउंसिलिंग में शामिल वेंडर एजेंसी के मुख्य कर्ताधर्ता कुलदीप की ओर से जो डाटा उपलब्ध कराया जाता था, उसकी एंट्री ही की जाती थी। इसमें किसी अन्य की कोई भूमिका नहीं होती थी। सूत्रों का कहना है कि कुलदीप के गिरफ्त में आने के बाद यह पता लग सकेगा कि इस हेराफेरी के पीछे कौन-कौन लोग हैं। इनमें कुछ सफेदपोशों के नाम भी सामने आने लगे हैं।
सीसीटीवी फुटेज खोलेंगे राज
आयुर्वेद निदेशालय में किन-किन लोगों का आना जाना था। वहां कितने बजे तक काम किया जाता था और गतिविधियां किस तरह की रहती थीं, यह जानकारी हासिल करने के लिए एसटीएफ ने सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं। खास कर उन दिनों की जब यह खेल उजागर हुआ।
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डाटा से हैंग हो गया हाईटेक कंप्यूटर
एसटीएफ की तीन टीमें साढ़े 17 लाख डाटा का विश्लेषण कर रही हैं। डाटा इतना बड़ा है कि कई बार विभाग का हाईटेक कंप्यूटर भी हैंग हो गया। एक-एक की-वर्ड सर्च करने में काफी टाइम लग जा रहा है। जिन बिंदुओं पर विश्लेषण किया जा रहा है उसे पूरा करने में कम से कम तीन दिन का समय और लगेगा।