34 डॉक्टरों का पंजीयन एक साल के लिए डिबार
चिह्नित डॉक्टरों में तीन हरियाणा, एक-एक राजस्थान, बिहार और हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत दर्शाए गए थे। शेष 28 डॉक्टरों के नाम प्रदेश के अलग-अलग जिलों के आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों में दर्ज थे। एनसीआईएसएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर यूपी बोर्ड ने सभी 34 डॉक्टरों का पंजीयन एक साल के लिए डिबार कर दिया है। बोर्ड ने संबंधित डॉक्टरों के गृह क्षेत्र के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारियों को भी पत्र भेजा है। साथ ही निर्देश दिया है कि यदि ये डॉक्टर क्लीनिक चला रहे हैं तो उनके मरीजों का उपचार करने पर रोक लगाई जाए।
दूसरे राज्य में काम करने पर जरूरी है पंजीयन
नियमों के मुताबिक, किसी भी राज्य में मरीजों का उपचार करने के लिए वहां के संबंधित बोर्ड में पंजीयन कराना अनिवार्य है। यदि यूपी में पंजीकृत कोई डॉक्टर दूसरे राज्य के मेडिकल कॉलेज या अस्पताल में कार्यरत होता है तो उसे वहां भी पंजीयन कराना पड़ता है। इसके लिए मूल राज्य का पंजीयन स्थानांतरित किया जाता है। जांच में ऐसे छह डॉक्टर भी सामने आए, जिनके नाम दूसरे राज्यों के कॉलेजों में दर्ज थे, लेकिन पंजीयन यूपी में ही था।