एफआईआर को लेकर सवाल सिर्फ अयोध्या की बैठक तक सीमित नहीं रहा। डायरी के अनुसार, 11 जून को लखनऊ में हुई बैठक में भी चार जून से शुरू हुए पूरे घटनाक्रम पर चर्चा हुई। निर्धारित स्थान पर डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव, भैयाजी जोशी, स्वामी गोविंद देव गिरि, नृपेंद्र मिश्र और कृष्ण मोहन पहुंचे। भोजन के बाद भैयाजी जोशी के साथ बैठक हुई, जिसमें बाद में लखनऊ क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार सिंह भी शामिल हुए। बैठक में कुल सात लोग मौजूद थे। डायरी के मुताबिक, इस बैठक में भी घटनाक्रम की जानकारी साझा की गई और एफआईआर नहीं कराने को लेकर सवाल उठा।
डायरी में यह भी उल्लेख है कि बाद के चरण में पुलिस की सहायता ली गई और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी थी। पुलिस ने भी कार्रवाई में सहयोग किया। इसी दौरान चोरी करने वाले एक युवक के नेपाल सीमा की ओर जाने की सूचना सामने आई। डायरी के अनुसार, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महज 24 घंटे के भीतर उस युवक को नेपाल से हिरासत में ले लिया। उसके कब्जे से चोरी की रकम भी बरामद की गई। इस घटनाक्रम से साफ है कि शुरुआती दौर में एफआईआर नहीं कराने का फैसला केवल पुलिसिया जांच की गति और चोरी की रकम बरामद करने की चिंता तक सीमित नहीं था। मामले के सार्वजनिक होने और उसके विधानसभा चुनाव पर संभावित असर को लेकर भी शीर्ष स्तर पर विचार-विमर्श हुआ था।