लखनऊ की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) ने 30 सितंबर 2020 को फैसला सुनाते हुए इस मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, उमा भारती, लोकसभा सदस्यों साक्षी महाराज, लल्लू सिंह व बृजभूषण शरण सिंह समेत सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में अयोध्या के ढांचा विध्वंस मामले में सत्र अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर सीबीआई ने सोमवार को आपत्ति दाखिल की। कोर्ट ने अगली सुनवाई 26 सितंबर को नियत की है।
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न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रेनू अग्रवाल की खंडपीठ ने यह आदेश अयोध्या निवासी हाजी महबूब अहमद व सैयद अखलाक अहमद की अपील पर दिया। इससे पहले राज्य सरकार व सीबीआई के वकीलों ने अपील पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह केस के पीड़ित नहीं हैं। ऐसे में बरी अभियुक्तों व पक्षकारों के खिलाफ अपील दायर करने का इन्हें हक नहीं है। कोर्ट ने सीबीआई व राज्य सरकार के अधिवक्ताओं को अपील पर आपत्ति दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया था। इस मामले में बरी लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती समेत 32 लोगों को दोषी करार देने की गुजारिश भी की गई है।
गौरतलब है कि लखनऊ की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) ने 30 सितंबर 2020 को फैसला सुनाते हुए इस मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, उमा भारती, लोकसभा सदस्यों साक्षी महाराज, लल्लू सिंह व बृजभूषण शरण सिंह समेत सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था।
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उधर, अपील में कहा गया कि दोनों याची इस मामले में न सिर्फ गवाह थे बल्कि घटना के पीड़ित भी हैं। उन्होंने विशेष अदालत के समक्ष अर्जी दाखिल कर खुद को सुने जाने की मांग भी की थी लेकिन विशेष अदालत ने उनके प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। अपीलकर्ताओं का यह भी कहना है कि केंद्र सरकार के दबाव में सीबीआई ने सत्र अदालत के फैसले के विरुद्ध अपील नहीं की, जबकि कई मुस्लिम संगठनों ने सीबीआई से अनुरोध भी किया था।