हालांकि सीएम आवास में जाने से पहले संतो का कहना था कि मंदिर मुद्दे को भाजपा गंभीरता से नहीं ले रही है, जबकि इसी मुद्दे के बल पर प्रदेश व केन्द्र में भाजपा की सरकार बनी है। दोनों जगह सरकार होने के बाद भी राम मंदिर के निर्माण में देरी हो रही है।
राम मंदिर निर्माण के मामले में भाजपा नेताओं की ओर से तरह-तरह के बयान आ रहे हैं। संत समाज चाहता है कि लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाए। सुरेश दास ने कहा कि हम लोग राम मंदिर के निर्माण और अयोध्या के मुद्दे पर मुख्यमंत्री से वार्ता करने आए हैं।
संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि अयोध्या का विकास भी होगा और राम मंदिर का निर्माण भी होगा। पर, हमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा करनी होगी। संतों ने कहा कि 25 जून को अयोध्या में संत सम्मेलन होगा। जिसमें मुख्यमंत्री भी आएंगे तो इन मुद्दों पर आगे चर्चा होगी। संतो के साथ अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता के अलावा अन्य कई संत शामिल थे।
दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास सहित सभी संत केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के उस बयान से नाराज थे जिसमें उन्होंने कहा था भाजपा, 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में राम मंदिर नहीं बल्कि विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। सुरेश दास ने कहा, ‘हम नकवी को नहीं जानते, हम तो भाजपा को जानते हैं। राम मंदिर का निर्माण भाजपा का एजेंडा रहा है। इसी मुद्दे की बदौलत भाजपा मजबूत हुई है।’