शीर्ष प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि अध्यक्ष बनाने का दावा करने वाले राज्य व केंद्र सरकार के जिम्मेदार लोगों से महंत नृत्यगोपाल दास ने अपना नाम न देख बुधवार को ही विरोध जताया। वे तब लखनऊ में थे, राज्य के जिम्मेदार लोगों के साथ उनकी गृहमंत्री अमित शाह से भी बात कराई गई। इस बीच बृहस्पतिवार को महंत नृत्य गोपालदास अयोध्या लौटे तो नाराज संतों-महंतों ने मणिरामदास की छावनी जाकर उनसे बात की।
इस दौरान महंत नृत्यगोपालदास बेहद तल्ख नजर आए। सरकार व उसके नए ट्रस्ट के खिलाफ मुखर हो गए। विरोध बढ़ता देख जिला प्रशासन ने राज्य सरकार व केंद्रीय गृह मंत्रालय को हालात की जानकारी दी। अंतत: फिर गृह मंत्रालय सक्रिय हुआ और नृत्यगोपालदास की मान-मनौव्वल की गई। जिसके बाद दोपहर तीन बजे संतों की सरकार के विरोध में होने वाली बैठक रद्द कर दी गई।
- महंत नृत्य गोपाल दास बृहस्पतिवार को अयोध्या लौटे तो, सुबह उनके यहां राममंदिर आंदोलन से जुड़े दर्जनों शीर्ष संत मिलने मणिरामदास की छावनी पहुंचे। बंद कमरे में घंटे भर चर्चा के बाद महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि सरकार का नया ट्रस्ट अयोध्या वाले स्वीकार नहीं करेंगे। इसमें राजनीतिक लोग कैसे शामिल किए गए।
दिगबंर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि राममंदिर के लिए जिन लोगों ने जिंदगी खपा दी, उनकी उपेक्षा करने वाली सरकार का संत विरोध करेंगे। तय हुआ कि दोपहर तीन बजे विरोध सभा करके प्रधानमंत्री को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
महंत गिरिशपति त्रिपाठी, संत समिति के अध्यक्ष कंहैयादास रामायणी, श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, महंत शशिकांत दास, महंत गिरीश दास आदि संतों की उपेक्षा खासकर महंत नृत्यगोपाल दास को अध्यक्ष न बनाए जाने से बेहद नाराज थे।