फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चढ़ावे में घोटाला: श्रद्धा संग मंदिरों में बढ़ रहा दान, राम मंदिर चंदे में चोरी के बाद पूरे देश में छिड़ी बहस

Sun, 21 Jun 2026 09:29 AM IST
Sharukh Khan अभिषेक सहज, अमर उजाला, लखनऊ

सार

राम मंदिर के दान में हेरफेर का मामला प्रकाश में आने के बाद पूरे देश में बहस छिड़ी है। वहीं, श्रद्धा के साथ मंदिरों में दान बढ़ रहा है। दान के प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विज्ञापन
राम मंदिर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश के प्रमुख मंदिरों में हर वर्ष श्रद्धालु अरबों रुपये का दान देते हैं। नकद राशि के अलावा सोना, चांदी, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं भी मंदिरों को प्राप्त होती हैं। बढ़ते दान के साथ इसकी सुरक्षा, पारदर्शिता और उपयोग को लेकर भी कड़ी निगरानी की जाती है। 
विज्ञापन


अयोध्या में राम मंदिर में दान की धनराशि में हेरफेर का मामला प्रकाश में आने के बाद पूरे देश में अब इस बात को लेकर लोगों में दिलचस्पी भी बढ़ गई है कि आखिर दान के रूप में मिलने वाली इतनी बड़ी राशि का प्रबंधन कैसे होता है। 

दान के प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। हम आपको बता रहे हैं देश और प्रदेश के कुछ प्रमुख मंदिरों के बारे में जहां हर वर्ष करोड़ों रुपये दान में मिलते हैं। ज्यादातर बड़े मंदिरों में दान की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी निगरानी, बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, सीलबंद दानपात्र, डिजिटल रिकॉर्डिंग और बैंकिंग प्रणाली का सहारा लिया जाता है।
विज्ञापन

कहां कितनी अनुमानित राशि दान में
 
मंदिर अनुमानित वार्षिक दान
तिरुपति बालाजी 3,500 – 5,000 करोड़ रुपये
वैष्णो देवी मंदिर 500 – 800 करोड़ रुपये
शिरडी साई बाबा 600 – 800 करोड़ रुपये
सिद्धिविनायक मंदिर 150 – 250 करोड़ रुपये
काशी विश्वनाथ मंदिर 100 – 200 करोड़ रुपये

 

  • काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी दानपात्रों की निगरानी सीसीटीवी और सुरक्षा कर्मियों के जरिए होती है। 
  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा नियमित लेखा परीक्षण और बैंकिंग व्यवस्था लागू है। 
  • बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन दानपात्रों की नियमित निगरानी की जाती है। 
  • मां विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्याचल : मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन संयुक्त रूप से दान व्यवस्था की निगरानी करते हैं। 
  • तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर, तिरुपति : देश के सबसे अधिक दान प्राप्त करने वाले मंदिर में अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और विशेष दान गणना प्रणाली लागू है। 
  • शिरडी साई बाबा मंदिर : ट्रस्ट के माध्यम से दान का प्रबंधन।
  • सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई: दान की डिजिटल मॉनिटरिंग और बैंकिंग व्यवस्था। वार्षिक ऑडिट अनिवार्य।
  • वैष्णो देवी मंदिर : दान की कंप्यूटरीकृत गिनती और बैंकिंग प्रणाली लागू।

बैठकों में नहीं रखा जाता था सोने-चांदी का पूरा ब्योरा
राम मंदिर के चढ़ावे घोटाले में एसआईटी को जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य मिला है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट की हर तीसरे माह होने वाली बैठक में मंदिर की आय और नकद दान का विवरण प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन सोने-चांदी एवं अन्य बहुमूल्य दान सामग्री की मात्रा, मूल्यांकन और उपलब्ध स्टॉक का विस्तृत ब्योरा बैठक के एजेंडे का नियमित हिस्सा नहीं था। एसआईटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वर्षों के दौरान प्राप्त हुई बहुमूल्य दान सामग्री का समुचित लेखा-जोखा किस स्तर पर रखा गया और उसकी निगरानी की व्यवस्था क्या थी। 
 

सूत्र बताते हैं कि एसआईटी को दान से संबंधित कई रसीदें और अभिलेख मिले हैं, जिनमें श्रद्धालुओं की ओर से सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और अन्य कीमती वस्तुएं चढ़ाने का उल्लेख है। हालांकि कई वस्तुओं के संग्रह, भंडारण और अंतिम स्थिति से संबंधित रिकॉर्ड अभी तक स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। इसी वजह से जांच टीम संबंधित दस्तावेज और जिम्मेदार कर्मियों से जानकारी जुटा रही है।

 
विज्ञापन

दान में मिली 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारत सरकार की संस्था मिंट (टकसाल) को जांच और गलाने के लिए पहले चरण में 9.44 क्विंटल (944 किलो) चांदी दी थी। राम मंदिर के लिए भक्तों की ओर से दान किए गए सोने और चांदी की गुणवत्ता और मात्रा के मूल्यांकन के लिए ट्रस्ट ने यह फैसला लिया था। चंपत राय ने कुछ महीने पहले यह जानकारी सार्वजनिक करते हुए बताया था कि दान के रूप में कुल 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना प्राप्त हुआ है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें