स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इस बीच मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि चंपत राय से इस्तीफा लिया नहीं गया, बल्कि उन्होंने नैतिक आधार पर स्वयं इस्तीफा दिया था।
गोविंद देव गिरी ने कहा कि चंपत राय पूरे मामले में निर्दोष हैं और उनकी किसी प्रकार की आर्थिक संलिप्तता नहीं है। उन्होंने कहा कि दानपात्र से प्राप्त चढ़ावे की गणना और उससे जुड़ी व्यवस्थाएं महासचिव चंपत राय के अधिकार क्षेत्र में आती थीं, जबकि उनकी जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट के खातों में जमा होने वाली राशि का लेखा-जोखा रखने तक सीमित है।
उन्होंने कहा, मेरा दानपात्र (हुंडी) में आने वाली राशि से कोई लेना-देना नहीं है। मेरी जिम्मेदारी केवल बैंक खातों में जमा धन का हिसाब-किताब रखना है। गणना कर्मियों की नियुक्ति को लेकर पूछे गए सवाल पर गोविंद देव गिरी ने कहा कि यह व्यवस्था भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के माध्यम से की गई थी, इसलिए इस संबंध में जिम्मेदारी भी उसी की बनती है।
जब उनसे पूछा गया कि यदि चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया है तो क्या कोषाध्यक्ष होने के नाते वह भी इस्तीफा देंगे, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, मैं क्यों इस्तीफा दूंगा? बिल्कुल नहीं दूंगा।
उन्होंने दोहराया कि उनका दायित्व केवल ट्रस्ट के खातों में जमा होने वाली धनराशि का प्रबंधन करना है और दानपात्र से प्राप्त चढ़ावे की गणना या उससे जुड़ी व्यवस्था से उनका कोई संबंध नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि चंपत राय के खिलाफ आर्थिक अनियमितता का कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है और उन्हें पूरे मामले में निर्दोष माना जाना चाहिए।