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अयोध्या: कृष्ण मोहन ने संभाली मंदिर व्यवस्था, गोविंद देव बोले- चंपत ने खुद दिया इस्तीफा; उनसे लिया नहीं गया

Tue, 07 Jul 2026 09:50 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या

सार

Ram Mandir dispute: राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने मंगलवार को राम मंदिर की व्यवस्थाओं की कमान संभालते हुए मंदिर परिसर का निरीक्षण किया।
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने मंगलवार को राम मंदिर की व्यवस्थाओं की कमान संभालते हुए मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। इसके साथ ही पूर्व महासचिव चंपत राय से मुलाकात की। दोनों के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। हालांकि, बातचीत किन मुद्दोंं पर हुई यह पता नहीं चल सका है। लेकिन माना जा रहा है कि दोनों के बीच मंदिर की व्यवस्थाओं तथा मौजूदा घटनाक्रम को लेकर बातचीत हुई है। चंपत पिछले कुछ दिनों से रामकोट स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम ट्रस्ट कार्यालय में रह रहे हैं।

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निरीक्षण के दौरान कृष्ण मोहन ने परिसर में चल रहे निर्माण, सुंदरीकरण और अन्य विकास कार्यों को देखा। उन्होंने संबंधित इंजीनियरों से निर्माण कार्य की गुणवत्ता, प्रगति और निर्धारित समय सीमा के बारे में जानकारी ली तथा कार्यों को तय मानकों के अनुरूप समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और संचालन संबंधी व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया।

महासचिव का पहला औपचारिक निरीक्षण
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सोमवार को हुए प्रशासनिक बदलावों के बाद कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिम्मेदारी संभालने के बाद उनका यह पहला औपचारिक निरीक्षण माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने निर्माण कार्यों के साथ-साथ मंदिर की समग्र व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

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चंपत ने खुद दिया इस्तीफा, उनसे इस्तीफा लिया नहीं गया: गोविंद देव गिरी

स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज - फोटो : amar ujala
 श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इस बीच मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि चंपत राय से इस्तीफा लिया नहीं गया, बल्कि उन्होंने नैतिक आधार पर स्वयं इस्तीफा दिया था।

गोविंद देव गिरी ने कहा कि चंपत राय पूरे मामले में निर्दोष हैं और उनकी किसी प्रकार की आर्थिक संलिप्तता नहीं है। उन्होंने कहा कि दानपात्र से प्राप्त चढ़ावे की गणना और उससे जुड़ी व्यवस्थाएं महासचिव चंपत राय के अधिकार क्षेत्र में आती थीं, जबकि उनकी जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट के खातों में जमा होने वाली राशि का लेखा-जोखा रखने तक सीमित है।

उन्होंने कहा, मेरा दानपात्र (हुंडी) में आने वाली राशि से कोई लेना-देना नहीं है। मेरी जिम्मेदारी केवल बैंक खातों में जमा धन का हिसाब-किताब रखना है। गणना कर्मियों की नियुक्ति को लेकर पूछे गए सवाल पर गोविंद देव गिरी ने कहा कि यह व्यवस्था भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के माध्यम से की गई थी, इसलिए इस संबंध में जिम्मेदारी भी उसी की बनती है।

जब उनसे पूछा गया कि यदि चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया है तो क्या कोषाध्यक्ष होने के नाते वह भी इस्तीफा देंगे, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, मैं क्यों इस्तीफा दूंगा? बिल्कुल नहीं दूंगा।

उन्होंने दोहराया कि उनका दायित्व केवल ट्रस्ट के खातों में जमा होने वाली धनराशि का प्रबंधन करना है और दानपात्र से प्राप्त चढ़ावे की गणना या उससे जुड़ी व्यवस्था से उनका कोई संबंध नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि चंपत राय के खिलाफ आर्थिक अनियमितता का कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है और उन्हें पूरे मामले में निर्दोष माना जाना चाहिए।
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