सात पूरक मंदिरों (भगवान शंकर, गणेश, सूर्यदेव, मां दुर्गा, अन्नपूर्णा, हनुमान व शेषावतार लक्ष्मण) और रामायणकालीन सप्तऋषियों (विश्वामित्र, महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, अगस्त्य, निषादराज, शबरी व अहिल्या) के मंदिरों में दर्शन शुरू करने की तैयारी है। मंदिरों के साथ श्रद्धालु अति प्राचीन कुबेर टीले पर भी दर्शन के लिए जा सकेंगे। अभी अति विशिष्टजन को ही इसकी अनुमति है।
परिसर में निर्मित परकोटा लगभग आठ सौ मीटर लंबा है। इसी के मध्य छह देवी-देवताओं के मंदिर बने हैं। परकोटे की परिधि के बाहर दक्षिण-पश्चिम दिशा में सप्तमंडप व शेषावतार मंदिर का निर्माण हुआ है। इसके पश्चिम में कुबेर टीला स्थित है। यदि श्रद्धालुओं को पैदल ही दर्शन व भ्रमण की अनुमति दी जाती है तो अधिक समय लगेगा और उन्हें काफी पैदल चलना पड़ेगा। इसी कारण ट्रस्ट ने गोल्फ कार्ट उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।