उन्होंने कहा, ‘फैजाबाद गजट में भी इसका जिक्र है।’ अधिवक्ता ने कहा, ‘केंद्र सरकार ने भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए मुस्लिमों के कब्रिस्तान का इस्तेमाल नहीं करने के मुद्दे पर विचार नहीं किया। इससे ‘धर्म’ का उल्लंघन हुआ है।’
पत्र में कहा गया है कि, ‘सनातन धर्म के धर्मग्रंथों को ध्यान में रखते हुए आपको यह विचार करना होगा कि क्या राम मंदिर की बुनियाद मुस्लिमों की कब्रों पर रखी जा सकती है? अब यह फैसला न्यास के प्रबंधन को लेना है।’
पत्र में ये भी लिखा है कि, ‘भगवान राम के प्रति पूरे सम्मान और विनम्रता के साथ मैं अनुरोध करता हूं कि ढहाई गई मस्जिद के निकट की करीब चार से पांच एकड़ की उस जमीन का इस्तेमाल नहीं किया जाए जहां मुस्लिमों की कब्रें हैं।’