रियल एस्टेट क्षेत्र में मंदी को देखते हुए आवास विकास परिषद इस साल अपनी किसी भी योजना में जमीन के रेट नहीं बढ़ाएगी। प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बोर्ड की बैठक में वित्त वर्ष 2020-21 के लिए जमीन की कीमत फ्रीज कर दी गईं है। इससे प्रदेश में परिषद की योजनाओं में घर, फ्लैट और प्लॉट खरीदने वालाें को राहत मिलेगी।
बोर्ड ने भ्रष्टाचार के दोषी उन कर्मचारियों से रिकवरी का प्रस्ताव भी पास कर दिया, जिनके कारण परिषद को वित्तीय नुकसान हुआ। आवास आयुक्त अजय चौहान व सचिव विशाल भारद्वाज ने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बीच में चुपके से किसी एक योजना में जमीन की कीमत न बढ़ाई जाए। इससे परिषद के जो फ्लैट या मकान बन चुके हैं, उनकी कीमतें भी नहीं बढ़ेंगी।
लीज पर दिए जाएंगे कम्युनिटी सेंटर
यह होगा असर...
जमीन की कीमत बढ़ने पर जो फ्लैट या मकान पहले से बने होते थे, उनकी भी कीमतें बढ़ जाती थीं। ऐसे में पुरानी संपत्तियां बिक नहीं पाती थीं। कीमत फ्रीज होने से जो नए मकान-फ्लैट बनेंगे, वे भी महंगे नहीं होंगे।
आवास आयुक्त ने बताया कि परिषद के कम्युनिटी सेंटर तीन साल के लिए लीज पर दिए जाएंगे। बुकिंग से आय व रखरखाव पर आने वाले खर्च को देखते हुए यह फैसला किया गया है। परिषद कुल 31 कम्युनिटी सेंटरों का संचालन करती है। आयोजन की बुकिंग संस्था परिषद के नियमों के तहत ही करेगी। परिषद के नियमों में जिनको किराए में रियायत देने का प्रावधान है, उनको रियायत मिलती रहेगी।
लखनऊ में 10 फीसदी तक सस्ते हो गए फ्लैट
बोर्ड ने खाली पड़े फ्लैटों की कीमतों को कम किए जाने का प्रस्ताव भी पास कर दिया है। हालांकि इसे सिर्फ लखनऊ की योजनाओं में लागू किया जाएगा। प्रदेश के अन्य शहरों में नहीं। बोर्ड ने राजधानी में अपनी तीनों आवासीय योजना अवध विहार, वृंदावन व आम्रपाली में फ्लैटों की कीमत कम कर दी हैं। इन योजनाओं में करीब 3000 फ्लैट खाली पड़े हैं। यहां 45 लाख से 80 लाख रुपये तक के फ्लैट हैं।