यदि आपके हाथों, पैरों या आंखों के आस-पास सूजन दिखती है। सिर दर्द रहता है। अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होती है। चेहरे पर तितली के आकार का लाल निशान, जो गालों और नाक के पुल को कवर करता है। हल्का बुखार बना रहता
है और रोशनी के प्रति संवेदनशीलता रहती है तो चिकित्सक की सलाह लें। यह ल्यूपस भी हो सकता है। यह कहना है केजीएमयू क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी और रूमेटोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डा. पुनीत कुमार का। वह विभाग में ल्यूपस दिवस पर आयोजित जागरुकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस दौरान ल्यूपस के बारे में मरीजों को विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें ल्यूपस से बचाव के बारे में भी जानकारी दी गई। विभाग की प्रोफेसर उर्मिला धाकड़ ने बताया कि यह संभावना है कि ल्यूपस आपके आनुवंशिकी और आपके पर्यावरण के संयोजन से उत्पन्न होता है। सहायक प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमार मौर्य ने बताया कि इस बार विश्व ल्यूपस दिवस 2025 का विषय संबद्धता, विश्वास और सफलता रखा गया है। उन्होंने बताया कि ल्यूपस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो तब होती है जब आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली आपके शरीर में स्वस्थ ऊतकों पर हमला करती है। यह संभावना है कि ल्यूपस आपके आनुवंशिकी और आपके पर्यावरण के संयोजन से उत्पन्न होता है। चूंकि ल्यूपस का इलाज नहीं किया जा सकता है , इसलिए डॉक्टर बीमारी के प्रबंधन और इसके लक्षणों का इलाज करने पर काम करते हैं। ल्यूपस के विभिन्न प्रकार हैं, जिनमें शामिल हैं सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (एसएलई), जो शरीर में कई अंगों या अंग प्रणालियों में तीव्र या पुरानी सूजन पैदा कर सकता है। वैसे तो ल्यूपस किसी को भी हो सकता है, लेकिन यह सबसे ज़्यादा महिलाओं को प्रभावित करता है । पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इसके होने की संभावना नौ से दस गुना ज़्यादा होती है। ल्यूपस किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन ज़्यादातर मामलों का निदान 20 और 30 की उम्र में होता है।
चित्रकला प्रतियोगिता और पुरस्कार वितरण समारोह
कार्यक्रम के दौरान मरीजों के लिए एक चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें उन्हें अपनी भावनाओं और अनुभवों को कला के माध्यम से व्यक्त करने का अवसर मिला। प्रतिभागियों को उनके सृजनात्मकता और भागीदारी के लिए
पदक और प्रमाण पत्र वितरित किए गए। डॉ. किशन और डॉ. लिली ने ल्यूपस के साथ जीने के भावनात्मक पहलुओं के बारे में चर्चा की, जिसमें उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया। मरीजों को विभाग द्वारा टी-शर्ट्स और टोपी भी बांटी गई।
कहां- कहां पड़ता है प्रभाव
यह बीमारी आम तौर पर आपके जोड़ों, गुर्दे, त्वचा, मस्तिष्क, रक्त कोशिकाओं, हृदय और फेफड़ों को प्रभावित करती है। वैसे तो यह बीमारी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन यह 15 से 45 वर्ष की महिलाओं में ज़्यादा आम है। यदि
आप ल्यूपस से पीड़ित हैं तो आप सूर्य के प्रकाश के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। चकत्ते के कारण सिर पर निशान पड़ जाते हैं, जिससे बाल झड़ने लगते हैं। ल्यूपस के कारण 70 फीसदी रोगियों में सिरदर्द होता है।
ल्यूपस का उपचार
ल्यूपस का निदान करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि ल्यूपस में देखे जाने वाले लक्षण कई अन्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं। ल्यूपस की पुष्टि करने वाला कोई सीधा परीक्षण नहीं है। हालांकि, डॉक्टर लक्षण के आधार पर इसका इलाज करते हैं। डॉक्टर एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी (एएनए) परीक्षण करवाने का सुझाव दे सकते हैं। सकारात्मक एएनए परीक्षण ल्यूपस की पुष्टि नहीं करता है। हालांकि, यदि यह परीक्षण सकारात्मक है, तो आपका डॉक्टर आपको ल्यूपस के लिए विशेष रूप से कुछ और परीक्षण करवाने के लिए कहेंगे।