लखनऊ। एक रोज सुबह आपकी आंख खुलती है और मोबाइल स्क्रीन पर एक नोटिफिकेशन चमकता है...आपके खाते से ₹10 लाख की निकासी हुई है। हाथ कांपते हैं, दिमाग सुन्न पड़ जाता है... और यकीन करना मुश्किल होता है कि जो मेहनत से आपने सालों में कमाया, वो चंद मिनटों में किसी साइबर ठग ने जालसाजी कर ऐंठ लिया। लेकिन… ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अगर आप सतर्क हैं, जागरूक हैं, और सबसे अहम... अगर आप समय पर कार्रवाई करते हैं, तो मेहनत की कमाई आपको वापस मिल सकती है। लखनऊ के ऐसे ही कुछ लोगों ने ये कर दिखाया। उन्होंने डर को नहीं, जागरूकता को चुना और बिना समय गंवाए उन्होंने साइबर क्राइम सेल से मदद ली। नतीजा... उन्हें उनकी जमापूंजी वापस मिली। ये खबर सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं है... ये एक सबक है आपके लिए, आपके परिवार के लिए। जानिए कैसे समय रहते की गई शिकायत ने ठगों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
गोमतीनगर के विवेकखंड निवासी पियूष खन्ना पेपरबिज मार्केटिंग एंड फाइनेंस कंपनी के डायरेक्टर हैं। 27 फरवरी को साइबर ठगों ने साइबर अटैक कर कंपनी के खाते से 14 बार में 20 लाख रुपये पार कर दिए थे। पीड़ित ने cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 12.58 लाख रुपये पीयूष को वापस दिलवा दिए।
चिनहट के यमुना विहार कॉलोनी निवासी श्याम सुंदर यादव मंडी निरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हैं। 11 फरवरी को दोस्त ने उनकी यूपीआई आईडी बनाई थी। पर यूपीआई की सुविधा के बारे में अधिक जानकारी नहीं होने पर उन्होंने इस्तेमाल नहीं की। फिर भी उनके दो बैंक खातों से 16.40 लाख रुपये निकल गए। समय रहते साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने ठगों के खाते से फ्रीज कराकर पीड़ित को 13 लाख रुपये वापस लौटा दिए।
गोमतीनगर के विनीत खंड में रहने वाले व्यवसायी शलभ गुप्ता के पास अक्तूबर 20224 में व्हाट्सएप पर मेसेज आया था। इसमें दिए गए लिंक को खोलते ही वह एक ग्रुप पर जुड़ गए। एडमिन ने उन्हें शेयर में निवेश कर मुनाफा कमाने का झांसा दिया। जाल में फंसे शलभ ने 27 लाख रुपये शेयर में लगा दिए, जो हड़प लिए गए। सही समय पर शिकायत का नतीजा रहा कि 25.11 लाख रुपये वापस मिल गए।
गोमतीनगर के विशालखंड-3 निवासी व्यापारी प्रशांत को जालसाजों ने ट्रेडिंग के नाम पर फंसाया। बीते फरवरी में 86. 54 लाख रुपये निवेश किए थे। मुनाफा तो दिखा पर रकम नहीं निकाल पाए। पुलिस ने इन्हें 19 लाख रुपये वापस दिलवा दिए।
शिकायत में देरी से कम हो जाती है रकम वापसी की उम्मीद
एसीपी साइबर क्राइम अभिनव ने बताया कि ठगी की रकम निकालने पर ठगों को कुछ समय लगता है। ऐसे में समय से की गई शिकायत रकम को फ्रीज कराने में मदद करती है। देरी से की गई शिकायत पर रुपये वापस होने की उम्मीद कम हो जाती है।
रकम दिलाने की यह होती है प्रकिया
इंस्पेक्टर ब्रजेश यादव ने बताया कि अगर पीड़ित 24 घंटे में थाने में शिकायत दर्ज करा देता है तो रकम मिलने की 80 प्रतिशत संभावना रहती है। शिकायत मिलते ही पुलिस दो घंटे में अपनी स्तर की कार्रवाई पूरी कर लेती है। जिन खातों में ठगी की रकम जमा होती है उससे संबंधित बैंक के मैनेजर से मेल के जरिये संपर्क करती है। इसके बाद बैंक की लीगल टीम आगे की कार्रवाई में जुट जाती है। कभी-कभी इसमें चार से पांच माह तक का समय लग जाता है।