गोमती नगर के विभव खंड स्थित आमोद आश्रम परिसर में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संध्या धरोहर की ओर से
लखनऊ। गोमतीनगर के आमोद आश्रम में मंगलवार को अवधी और भोजपुरी लोकगीतों से शाम गुलजार हुई। साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था अल्पिका की ओर से स्वर पांखुरी का आयोजन डॉ. राकेश श्रीवास्तव के निर्देशन में किया गया। इस अवसर पर ऑनलाइन कार्यशाला के प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी बांटे गए।
अल्पिका की अध्यक्ष उमा त्रिगुणायत ने बताया कि धरोहर संकलन के अंतर्गत दस दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में भोजपुरी और अवधी लोकगीत सिखाए गए। इसमें अलग-अलग शहरों के 30 प्रतिभागी शामिल हुए। इन प्रतिभागियों ने मंगलवार को प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान बभोला तोहार बऊरहवा सती..., सावनी काले बादल आए सखी री..., सावन की झूमर सवान की आइले बहार हो..., छठ गीत विनती करेली छठी मइया सुनी अरजी हमार... मुंडन गीत घर में से निकले होरिलवा दुअरा पर रोवेले हो... और देशभक्ति गीत हम त चरखा से लिहनी सूराज चरखवा चालू रहे... जैसे गीतों की प्रस्तुति ने सभी का मन जीत लिया।
अल्पिका की सचिव रेणू शर्मा और आमोद आश्रम की सचिव अनिता श्रीवास्तव ने बताया कि प्रतिभागियों में पुणे से कल्पना सक्सेना, मुंबई से किरण बाला, मथुरा से सत्यप्रकाश, कानपुर से सुनीता पांडेय, लखनऊ से शारदा पांडेय, गुरु प्रसाद तिवारी, वंदना शुक्ला, विभा श्रीवास्तव, प्रतिभा वर्मा, अरुणा उपाध्याय, अंजलि सिंह, सुरुचि शुक्ला, अर्चना गुप्ता, कुमुद श्रीवास्तव, वीना सक्सेना, अनीता सिन्हा, और सुषमा प्रकाश आदि की मौजूदगी रही।