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राममंदिर की मजबूती तय करेगा आटोमेटिक मिक्सिंग प्लांट, भूकंप के झटके नहीं करेंगे असर

Tue, 03 Nov 2020 08:31 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
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राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण सदियों तक आधुनिक इंजीनियरिंग का बेमिसाल उदाहरण होगा। इसकी रिपोर्ट तैयार करने में आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञ कोई पहलू छोड़ना नहीं चाहते। 
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आईआईटी की टीम यहां की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा स्ट्रक्चर प्लान करने में जुटी है कि नदी की धारा भविष्य में मुड़ने पर भी मंदिर को कोई नुकसान न पहुंचे। ट्रस्ट ने तय किया है कि एक आधुनिक आटोमेटिक मिक्सिंग प्लांट लगाकर नींव के लिए मसाला बनाने से पहले सीमेंट में विशेष रसायन की मिक्सिंग की जाएगी। 

20 टन का लोडर भी मंगाया जाएगा, जो निर्माण के दौरान वाइब्रेट करके नींव की भूकंपरोधी क्षमता और मजबूती परखेगा। सूत्रों का कहना है कि लैब में एक सौ फीट गहरी मोरंग-सीमेंट-गिट्टी से बनी नींव के पिलरों को भूकंप के भारी झटके देकर परखा जा रहा है। 
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राममंदिर से चंद कदम दूर सरयू का कछार होने और नदी की धारा बदलते रहने के खतरनाक इतिहास को लेकर सबसे ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है। विशेषज्ञ नदी के खतरनाक वेग को पिलर से टकराकर सुनिश्चित कर लेना चाहते हैं कि हजारों साल के सफर में यदि कभी नदी की धारा मुड़े तो भी राममंदिर चट्टान की तरह खड़ा रहे। दूसरी तरफ रामघाट स्थित कार्यशाला से पत्थरों की शिफ्टिंग की भी तैयारी तेज हो गई है।
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सारा फोकस राममंदिर की मजबूती पर: चंपत राय

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि हमारा फोकस राममंदिर की मजबूती पर है। एलएंडटी सहित टाटा कंस्ट्रक्शन व ट्रस्ट के इंजीनियरों सहित आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों के साथ तय हुआ है कि मंदिर की नींव, पत्थरों की आयु के हिसाब से होनी चाहिए।

राममंदिर के लिए शेष करीब साढ़े तीन लाख घन फुट पत्थरों की आपूर्ति की भी तैयारी की जा रही है। इसके लिए राजस्थान के बंशीपहाड़पुर से संपर्क किया जा रहा है, शीघ्र ही पत्थरों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
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