राजधानी के संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) मानो ऑटो एवं टैम्पो ड्राइवरों
के सामने लाचार हैं।
नई किराया सूची जारी हुए एक पखवारा बीत चुका है,
बावजूद इसके 90 फीसदी ऑटो-टैम्पो पर नजर नहीं आती। चालक सवारों से मनमाना
किराया वसूल रहे हैं।
आरटीओ ने फरवरी में
ऑटो और फिर टैम्पो की संशोधित किराया सूची जारी की थी। बाकायदा शिविर लगाकर
चालकों को सूची बांटी भी गई, लेकिन ज्यादातर ऑटो-टैम्पो में यह नजर नहीं
आती।
जानकारों के अनुसार यूनियन पदाधिकारियों के संरक्षण में अवैध
ऑटो-टैम्पो चलाने वाले ही किराया सूची चस्पा होने में व्यवधान डाल रहे हैं।
वहीं, सूची लगाने को लेकर आरटीओ के स्तर से भी सख्ती नहीं हो रही है। अधिक
किराया वसूलने के मामले में शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अनदेखी किए हुए
हैं।