चारबाग स्टेशन और लखनऊ जंक्शन रात होते ही लूट के अड्डे में तब्दील हो जाते हैं। यात्रियों से ऑटो और टेंपो चालक मनमाना किराया वसूलते हैं। विरोध करने पर चालक बदसलूकी करते हैं। शिकायत के बावजूद जीआरपी कोई कार्रवाई नहीं करती है।
मूलरूप से आजमगढ़ निवासी सुरेश पासी रविवार देर रात ट्रेन से चारबाग स्टेशन पहुंचे। बाहर निकलते ही उन्हें ऑटो व टैंपो संचालकों ने घेर लिया। हाथ पकड़कर जबरदस्ती बैठाने लगे। उन्होंने बताया कि (यूपी 32 बीएन 9386) टैंपो वाले से जब निशातगंज का किराया पूछा तो उसने दो सौ रुपये बताया। इसके बाद जब दूसरे ऑटो चालक से बात की तो वह ढाई सौ बताने लगा।
एक अन्य यात्री अमित सिंह ने बताया कि उनकी (यूपी 32 जीएन 9313) ऑटो चालक से किराए को लेकर कहासुनी हो गई। मनमाना किराया वसूला जा रहा है। अमित ने आरोप लगाया कि जीआरपी व रेलवे अधिकारियों से शिकायत करने गया तो उन्हें टरका दिया गया। अमित ने डीआरएम दफ्तर में शिकायत दर्ज कराने की बात कही।
ऐसे ही सैकड़ों यात्री जीआरपी की लापरवाही का खामियाजा भुगतने को मजबूर हैं। बूथ पर सिपाही बैठते तो हैं, लेकिन वो ऑटो और टैंपो चालकों का समर्थन करते हैं। यात्रियों को अनसुना कर देते हैं। यात्री फुरकान ने बताया कि अक्सर दिल्ली आवाजाही के दौरान ऑटो चालकों से निपटना पड़ता है।
पर्ची व्यवस्था नहीं होने से लूट
स्टेशन पर खड़े टैंपो
- फोटो : amarujala
रात होते ही चारबाग स्टेशन व लखनऊ जंक्शन पर सिर्फ हरे ऑटो और टैंपो ही नजर आते हैं। जो पूरे स्टेशन को घेर लेते हैं। वहीं टैंपो स्टेशन परिसर में प्रतिबंधित हैं और ऑटो को बूथ के पास खड़े होने की अनुमति है। बूथ पर नंबर आने के बाद ही उन्हें यात्रियों को बैठाने की इजाजत है।
जीआरपी बूथ पर पहले पर्ची व्यवस्था लागू थी, जिसमें यात्रियों और ऑटो चालक का विवरण दर्ज होता था। वहीं बाद में इसे बंद कर दिया गया। अब स्थिति यह है कि पर्ची व्यवस्था न होने से ऑटो चालक बेलगाम हो चुके हैं। यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं। यह सब जीआरपी की शह पर हो रहा है।
‘रात में स्टेशन पर घुसने वाले और अनियमितता करने वाले ऑटो व टैंपो चालकों का चालान किया जाता है। सिपाहियों को भी हिदायत दी जाती है। मेरे जाने के बाद दोबारा स्थितियां बदतर हो जाती हैं।’ - यूपी सिंह, इंस्पेक्टर, जीआरपी चारबाग