इस बार होलिका दहल एक मार्च को सात बजे के बाद ही करें। पूर्णिमा का मान एक मार्च को सुबह 7 बजकर 53 मिनट से दो मार्च की सुबह 6 बजे तक है जबकि भद्रा काल शाम 6 बजकर 58 मिनट के बाद ही खत्म होगा।
ऐसे में होलिका दहन के लिए एक मार्च को शाम 7 बजे के बाद करना श्रेयस्कर रहेगा, जो अगले दिन सुबह 6 बजे तक पूर्णिमा का मान रहने तक करना उत्तम है। इस बार होलिका दहन में भद्रा काल लोगों को पशोपेश में नहीं डालेगा।
पं. इंदीवर त्रिपाठी ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह 7:53 बजे से पूर्णिमा का मान शुरू हो जाएगा। ये लगभग 22 घंटे रहेगा। उन्होंने बताया कि चूंकि भद्रा बृहस्पतिवार शाम 6:58 बजे ही खत्म हो चुकी होगी, इसलिए भद्रा का संकट भी नहीं रहेगा। शाम को निशा मुख प्रदोष काल से लेकर निशीथ काल तक होलिका दहन करना उत्तम रहेगा। विभिन्न लोकरीति के अनुसार लोग ठंडी होली का भी पूजन करेंगे।