इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में यूपी के बहुचर्चित हाथरस केस से सम्बंधित आडियो विजुअल 16 जनवरी को सम्बंधित वकीलों व पक्षकारों को दिखाए जाएंगे, जो इनकी सामग्री देखकर इनपर अपना पक्ष पेश कर सकेंगे। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चल रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकीलों को कहा कि उप्लब्ध आडियो विजुअल सामग्री को अदालत ने देखा है। कोर्ट ने इसे पक्षकारों के अधिवक्ताओं समेत हाथरस के तत्कालीन डीएम व एसपी समेत पीड़िता के परिवार के एक या दो सदस्यों को भी दिखाए जाने की पेशकश की, जिससे इस सम्बंध में आगे कार्यवाही हो सके।
पक्षकारों के वकीलों की सहमति से कोर्ट ने 16 जनवरी को हाईकोर्ट के वीडियो कांफ्रेंसिंग रुम या वहां अन्य किसी उपयुक्त जगह पर दिखाए जाने को कहा है। जिसकी पूर्व सूचना सम्बंधित वकीलों व पक्षकारों को दी जाएगी। न्यायमूर्ति पंकज मितल और न्यायमूर्ति राजन रॉय की खंडपीठ ने 16 दिसंबर को यह आदेश हाथरस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर गरिमापूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार के अधिकार शीर्षक से कायम जनहित याचिका पर दिया, जो बाद में कोर्ट की वेबसाइट पर उप्लब्ध हुआ। इस केस की पहले सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में ही होने का आदेश दिया था।
यह था मामला
उतर प्रदेश के हाथरस जिले के चंदपा इलाके के बूलगढ़ी गांव में 14 सितंबर को चार लोगों ने कथित रूप से 19 साल की दलित युवती से सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस दौरान युवती को गंभीर चोट आई थी। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान 29 सितंबर को पीड़िता की मौत हो गई थी। पीड़िता के शव की 30 सितंबर को रात के अंधेरे में उसके घर के पास ही अंत्येष्टि कर दी गई थी। उसके परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया, जबकि स्थानीय पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि परिवार की इच्छा के मुताबिक ही अंतिम संस्कार किया गया।