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Lucknow News: कार्यशाला में जाना अभिलेखागारों का महत्व और रोजगार की संभावनाएं

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लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय अभिलेख दिवस के उपलक्ष्य में राजकीय अभिलेखागार परिसर में चल रही अभिलेख प्रबंधन एवं संरक्षण विषयक छह दिवसीय कार्यशाला का शनिवार को समापन हुआ। कार्यशाला के सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यशाला में प्रतिभागियों को अभिलेखागार का महत्व, अभिलेख व पांडुलिपियों के संरक्षण की वैज्ञानिक विधियां और अभिलेखागारों में शोध और रोजगार की संभावनाओं के बारे में बताया गया।
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प्रथम सत्र में क्षेत्र सहायक शिव कुमार यादव ने बताया कि इस समय 735 से अधिक अभिलेखागार कार्यशील हैं, जिनमें समय-समय पर आर्काइविस्ट और अन्य पदों के लिए विज्ञापन निकलते रहते हैं। यहां युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सकता है। राष्ट्रीय अभिलेखागार, भारत सरकार तथा अन्य अभिलेखागारों में एक वर्षीय आर्काइवल डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इच्छुक अभ्यर्थी डिप्लोमा प्राप्त कर विभिन्न पदों पर रोजगार पा सकते हैं। कार्यक्रम में 137 शोधार्थी उपस्थित रहे। डॉ. सुशील कुमार पांडेय, दिलीप कुमार गुप्ता और डॉ. एसएन चौबे ने प्रशिक्षार्थियों से कहा कि बिना अभिलेखागार के शोध की परिकल्पना नहीं की जा सकती। ऐसे शोध प्रमाणिक भी नहीं माने जाते हैं। अंतिम दिन मुख्य अतिथि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉ. एसएन चौबे, वित्त नियंत्रक संस्कृति निदेशालय दिलीप कुमार गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार पांडेय को निदेशक अमित कुमार अग्निहोत्री ने अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कार्यशाला के सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी दिया।
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