बसपा में आकाश की जगह ईशान को राजनीति में लाने की मायावती की रणनीति के पीछे जेन-जी को वजह माना जा रहा है। इसके जरिये मायावती ने यह संदेश दिया है कि पार्टी में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाया जा रहा है। साथ ही आकाश को हटाए जाने से उपजी नाराजगी को भी कम करने की कवायद की गई है। दरअसल आकाश युवा वर्ग में खासे लोकप्रिय होते जा रहे हैं।
कई पदाधिकारियों का बढ़ा कद
मायावती ने कई पदाधिकारियों का कद भी बढ़ाया है। हाल ही में पार्टी से बाहर किए गए रणधीर सिंह बेनीवाल की वापसी के बाद उनको पूर्व की तरह सहारनपुर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर का प्रभारी बनाया गया है। इसी तरह नेशनल कोआर्डिनेटर रामजी गौतम और लालाराम को भी कई अन्य राज्यों का प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा विपुल कुमार को हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है।
कारोबार संभाल रहे थे ईशान
सक्रिय राजनीति में आने से पहले ईशान आनंद अपने पिता आनंद कुमार का कारोबार संभाल रहे थे। उन्होंने भी अपने बड़े भाई आकाश आनंद की तरह लंदन में पढ़ाई की है। करीब 27 वर्षीय ईशान को मायावती ने पिछले साल अपने जन्मदिन पर सबसे मिलवाया था। इसके बाद से उनके राजनीति में आने के कयास लगने लगे थे। उनका विवाह नोएडा के कारोबारी की बेटी राधिका खन्ना से बीते वर्ष 24 अप्रैल को हरियाणा में हुई थी, जिसमें मायावती भी मौजूद थीं।
मायावती को रिपोर्ट करेंगे ईशान
दरअसल, बसपा में मायावती ने छोटे भतीजे ईशान आनंद को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। ईशान को उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है। वह संगठन के कार्यों की समीक्षा के बाद मायावती को रिपोर्ट करेंगे। इस बदलाव के बाद पूर्व राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की वापसी मुश्किल हो गई है। वहीं, आकाश को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने से उनके समर्थक मायूस हैं और सोशल मीडिया पर उनकी वापसी की मांग कर रहे हैं।
एक्स पर 'उम्मीदों का आकाश' ट्रेंड
आकाश पर गाज गिरने के बावजूद उनके निष्कासन को लेकर सहमति नहीं बनी थी। रविवार को उनके समर्थन में सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर 'उम्मीदों का आकाश' ट्रेंड होने लगा। इसने पार्टी हाईकमान की नाराजगी बढ़ा दी। इसके बाद देर शाम पार्टी प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में ईशान को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाने का फैसला लिया गया।
हालांकि, मायावती ने यूपी और उत्तराखंड की जिम्मेदारी अपने पास ही रखी है। आकाश की बेदखली के पीछे उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को जिम्मेदार माना जा रहा है। अशोक के निष्कासन के बाद से ही आकाश पर भी गाज गिरने के कयास लगाए जाने लगे थे।
आकाश के भविष्य का फैसला 10 को संभव
आकाश के बसपा में सियासी भविष्य को लेकर आगामी 10 सितंबर को कोई अहम फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, मायावती 9 सितंबर को दिल्ली में वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर पार्टी संगठन में फेरबदल को लेकर कुछ अहम फैसले ले सकती हैं। इसमें आकाश को पार्टी से बाहर करने या उन्हें एक और मौका देने पर विचार हो सकता है।