सरकार ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि 15 मार्च 2012 से सितंबर 2014 तक प्रदेश में पुलिस पर हमले की कुल 622 घटनाएं हुईं। इन सभी मामलों में एफआईआर दर्ज कराकर 3936 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
सरकार यह जानकारी नहीं दे पाई कि हमलों में कितने पुलिसकर्मियों की जान गई। इस मामले में सरकार के जवाब से असंतुष्ट बसपा और भाजपा के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।
संसदीय कार्य मंत्री मो. आजम खां ने विपक्ष को इन घटनाओं को राजनीतिक चश्मे से न देखने की नसीहत दी।
प्रश्न प्रहर में भाजपा के सुरेश कुमार खन्ना के एक सवाल के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री ने यह जानकारी देते हुए स्वीकार किया कि इटावा, औरैया, सहारनपुर, ज्योतिबाफुलेनगर, आगरा तथा लखनऊ के थानों के दरोगा, सिपाहियों पर असमाजिक तत्वों ने हमला किया।