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ढाई साल में यूपी पुलिस पर हुए 622 हमले

Tue, 10 Mar 2015 01:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सरकार ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि 15 मार्च 2012 से सितंबर 2014 तक प्रदेश में पुलिस पर हमले की कुल 622 घटनाएं हुईं। इन सभी मामलों में एफआईआर दर्ज कराकर 3936 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
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सरकार यह जानकारी नहीं दे पाई कि हमलों में कितने पुलिसकर्मियों की जान गई। इस मामले में सरकार के जवाब से असंतुष्ट बसपा और भाजपा के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

संसदीय कार्य मंत्री मो. आजम खां ने विपक्ष को इन घटनाओं को राजनीतिक चश्मे से न देखने की नसीहत दी।

प्रश्न प्रहर में भाजपा के सुरेश कुमार खन्ना के एक सवाल के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री ने यह जानकारी देते हुए स्वीकार किया कि इटावा, औरैया, सहारनपुर, ज्योतिबाफुलेनगर, आगरा तथा लखनऊ के  थानों के दरोगा, सिपाहियों पर असमाजिक तत्वों ने हमला किया।
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आजम ने किया बचाव, कहा हो रही विवेचना

पुलिस कर्मियों पर हमले में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर कार्रवाई की गई। खन्ना ने कहा कि जब इस सरकार में सिपाही से लेकर सीओ तक सुरक्षित नहीं हैं तो जनता की सुरक्षा कैसे होगी?

आजम ने कहा कि ऐसे मामले में एफआईआर दर्ज करके ईमानदारी से विवेचना की जा रही है। सही सूचना होगी तभी कार्रवाई होगी।

ऐसी घटनाओं को रोकने की पूरी कोशिश की जा रही है। मौर्य ने कहा कि संसदीय कार्यमंत्री स्पष्ट उत्तर न देकर लीपापोती कर रहे हैं। उन्हें बताना चाहिए कि कितनी हत्याएं हुई हैं?

जवाब से असंतुष्ट सदस्यों ने यह कहते हुए सदन से बहिर्गमन किया कि सरकार संवेदनहीन है। जब कानून के रखवालों की रक्षा नहीं हो पा रही है तो जनता की सुरक्षा कैसे हो सकती है?

सुरेश खन्ना ने पुलिस के राजनीतिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना राजनीतिक संरक्षण के हमले नहीं होते। ज्यादातर हमले समाजवादी पार्टी के लोगों ने ही किए हैं। इसके बाद वह भी अपने दल के सदस्यों के साथ बहिर्गमन कर गए।
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