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एटीएस ने मानव तस्करों के गैंग का बदमाश दबोचा

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लखनऊ। जेल में बंद साथियों की जमानत कराने लखनऊ आए म्यांमार के रहने वाले एक मानव तस्कर को शनिवार सुबह एटीएस ने चारबाग से गिरफ्तार कर लिया। ये गैंग रोहिंग्या व बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध तरीके से भारत लाकर महिलाओं व बच्चों को बेचता है।
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एटीएस के आईजी जीके गोस्वामी के मुताबिक, मानव तस्करों के गिरोह के सरगना मोहम्मद नूर इस्लाम, इस्माइल व एक अन्य को एटीएस ने 27 जुलाई को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। ये तीनों लखनऊ जेल में निरुद्ध हैं। शुक्रवार को तीनों की पेशी थी। ऐसे में इनका साथी मोहम्मद रफीक उर्फ रफीक उल इस्लाम निवासी बहादुरपुर कामिला, हैदराबाद व मूल निवासी म्यांमार तीनों साथियों से कचहरी में मुलाकात करने के लिए लखनऊ आया था। शुक्रवार को तीनों को पेशी पर कचहरी नहीं लाया गया। ऐसे में शनिवार सुबह रफीक साथियों से मिलने जेल जाने वाला था मगर उससे पहले ही चारबाग में होटल के बाहर से एटीएस के दस्ते ने उसे दबोच लिया। आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया है।
बांग्लादेश के रोहिंग्या कैंप में पैदा हुआ था रफीक
मूल रूप से म्यांमार के निवासी रफीक के माता-पिता बरसों पहले बांग्लादेश चले गए थे। वहीं के रोहिंग्या कैंप में रफीक का जन्म हुआ था। चार साल की उम्र में ही रफीक के माता-पिता की मौत हो गई। इसके बाद उसके चाचा मकसूद अली उसे लेकर सीमा पार कर भारत आ गए और पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में रहने लगे। इसके बाद रफीक दिल्ली और मेवात में भी काफी समय रहा। मेवात में वह एक फैक्टरी में नौकरी करने लगा और वहीं उसने आधार कार्ड बनवा लिया था। हालांकि मौजूदा समय में वह हैदराबाद के बहादुरपुरा में रह रहा था।
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रोहिंग्या की जमानत का लेता था ठेका
एटीएस की छानबीन में पता चला है कि हैदराबाद की मीट फैक्टरी में काम करने के दौरान रफीक की दोस्ती वहीं काम करने वाले इस्माइल से हो गई थी। जबकि इस्माइल की दोस्ती नूर से पहले से थी। रफीक ने नूर से मोबाइल पर बातचीत शुरू कर दी। फिर वह भारतीय जेलों में बंद रोहिंग्या के परिवारीजनों से उनकी जमानत कराने का ठेका लेने लगा। कुछ पैसे वकील को देकर किसी तरह जमानत करा लेता था। इसी वजह से तमाम रोहिंग्या रफीक के संपर्क में थे। एक रोहिंग्या की जमानत पर रफीक को 20 से 30 हजार रुपये मिल जाते थे। नूर व रफीक रोहिंग्या व बांग्लादेशी महिलाओं को शादी और बच्चों व पुरुषों को काम दिलाने का झांसा देकर दिल्ली एनसीआर, नोएडा, गाजियाबाद आदि शहरों में लाते थे। इसके एवज में मोटी रकम ऐंठते थे। यहां इनके फर्जी पहचान पत्र बनवा देते थे। फिर महिलाओं व बच्चों को बेच देते थे जबकि पुरुषों को किसी कबाड़ी के यहां या फैक्टरी में काम दिला देते थे।
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