झांसी में उमेश पाल हत्याकांड के शूटर असद और गुलाम के एनकाउंटर के बाद मीडिया से मुखातिब हुए स्पेशल डीजी कानून-व्यवस्था एवं अपराध प्रशांत कुमार ने एक अहम खुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि शूटरों का झांसी आने का मकसद अतीक को साबरमती से प्रयाराज ला रहे पुलिस काफिले पर हमला करना था। हैरानी की बात है कि इस खुलासे के बाद भी प्रयागराज पुलिस ने अतीक की सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए। इंटेलिजेंस को भनक तक नहीं लगी कि अतीक और अशरफ को ठिकाने लगाने के लिए शूटरों की तिकड़ी प्रयागराज आ चुकी है।
वहीं दूसरी ओर अतीक और अशरफ को मारने वाले तीनों शूटरों के बयान पर पुलिस अधिकारियों को भी यकीन नहीं हो रहा है। बड़ा माफिया बनने की चाहत में अतीक और अशरफ को पुलिस की मौजूदगी में मारने का जोखिम लेना आसान नहीं था। वहीं शूटरों के पास से जो लाखों रुपये कीमत की तुर्की मेड जिगाना पिस्टल मिली है, उसे हासिल करना साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले शूटरों के लिए मुश्किल था। इसी वजह से आशंका जताई जा रही है कि ये वारदात किसी और के इशारे पर अंजाम दी गयी है।
बताना जरूरी है कि जिगाना पिस्टल का इस्तेमाल कुछ खाड़ी देशों की सेनाएं भी करती है। इस पिस्टल से पंजाब के मशहूर गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या करने की भी चर्चा है जो शूटरों या वारदात के मास्टरमाइंड के पंजाब लिंक की ओर इशारा कर रहे हैं। शायद इसी उहापोह की वजह से अतीक और अशरफ की मौत के 24 घंटे बीतने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कोई बयान देने से बच रहे हैं।
कहीं आईएसआई लिंक का काम तो नहीं
अतीक के रिमांड नोट में पंजाब में हथियार एकत्र कर लश्कर ए तैयबा, खालिस्तानी अलगाववादी संगठन को भेजने वाले आईएसआई लिंक का जिक्र किया गया था। पुलिस ने दावा किया था कि अतीक ने पंजाब जाकर इस लिंक का पता बताने की बात पूछताछ में कही है। आशंका जताई जा रही है कि कहीं आईएसआई से जुड़े पंजाब के इसी व्यक्ति ने तो अतीक को ठिकाने लगाने के साजिश तो नहीं रची थी।