परीक्षा में पास होने के लिए सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को 33 फीसदी और अनुसूचित जाति और जनजाति के अभ्यर्थियों को पास होने के लिए 30 फीसदी अंक लाने हैं। प्रदेश भर में करीब एक लाख 20 हजार परीक्षार्थी पंजीकृत थे। पेपर के स्तर को देखते हुए कहा जा रहा है कि इसमें पास होना ही मुश्किल है। इस लिहाज से पूरे पद भरना संभव नहीं दिख रहा।
शिक्षामित्रों को छांटने के लिए बनाया कठिन पेपर
परीक्षा देने आए परीक्षार्थियों ने पेपर के पैटर्न तथा कठिन होने पर आक्रोश जताया। उनका कहना था कि सरकार ने केवल शिक्षामित्रों को छांटने के लिए इस तरह का प्रश्नपत्र बनाया। आमतौर पर प्रतियोगी परीक्षा में बहुविकल्पीय सवाल पूछे जाते हैं। इसके बावजूद शिक्षक भर्ती में लिखित परीक्षा ली गई। टीईटी का रिजल्ट 13-14 फीसदी रहता है। यह पेपर तो उससे भी कठिन था। इस लिहाज से 30 फीसदी अंक लाना भी चुनौती होगी।