आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बदलते दौर में लखनऊ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को एआई एजेंट की नई तकनीक से रूबरू कराया गया। अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय के कोडिंग क्लब ‘कोडिंग कॉन्नोइसर्स’ की ओर से ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट्स 101 : फाउंडेशन’ विषय पर इंटरैक्टिव सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें बीटेक और बीसीए के 150 से अधिक विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।
सत्र में कोडिंग कॉन्नोइसर्स की लीड रित्विका मिश्रा ने बताया कि एआई एजेंट केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं हैं। वे डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करने, संदर्भ और स्मृति बनाए रखने तथा जटिल कार्यों को कई चरणों में पूरा करने में सक्षम हैं।
उन्होंने बताया कि भविष्य में एआई एजेंट सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, नागरिक शिकायतों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने, दस्तावेजों के विश्लेषण, आपदा प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और स्वास्थ्य व शिक्षा सेवाओं को प्रभावी बनाने में उपयोगी हो सकते हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एआई एजेंट मरीज से प्रारंभिक जानकारी लेकर संभावित जोखिम पहचानने, नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र की जानकारी देने और चिकित्सकीय परामर्श का समय तय कराने में मदद कर सकते हैं।
कई एजेंट मिलकर करेंगे एक समस्या का समाधान
सत्र में बहु-एजेंट प्रणाली की अवधारणा भी समझाई गई। बताया गया कि अलग-अलग एआई एजेंट किसी एक समस्या के विभिन्न हिस्सों पर एक साथ काम कर सकते हैं। मसलन, नागरिक शिकायत में एक एजेंट जानकारी जुटाए, दूसरा संबंधित विभाग की पहचान करे, तीसरा प्राथमिकता तय करे और चौथा शिकायत की प्रगति की जानकारी नागरिक को दे। इससे जटिल समस्याओं का समाधान तेज और व्यवस्थित हो सकता है।
कार्यक्रम में एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। विद्यार्थियों को डेटा गोपनीयता, पारदर्शिता, मानवीय निगरानी और एआई आधारित निर्णयों की विश्वसनीयता के बारे में बताया गया। कार्यक्रम अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय के डीन प्रो. सतेंद्र पाल सिंह के मार्गदर्शन और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के समन्वयक डॉ. हिमांशु पांडेय की अध्यक्षता में हुआ।