अगले दिन मायावती के बुलावे पर नसीमुद्दीन, राम अचल राजभर तथा राष्ट्रीय सचिव मेवालाल गौतम की अगुवाई में बसपा के हजारों कार्यकर्ताओं ने आंबेडकर प्रतिमा पर अमर्यादित और अशोभनीय टिप्पणियां कीं।
आरोपियों ने दयाशंकर सिंह को फांसी देने की मांग के साथ भीड़ को जातीय और वर्ग भेद बताकर शत्रुता और हिंसा के लिए उत्तेजित किया। इस मामले में पुलिस ने 21 जून 2017 को चार्जशीट लगते हुए नसीमुद्दीन, मेवालाल, रामअचल राजभर, नौशाद अली और अतर सिंह राव को आरोपी बनाया।
चार्जशीट दायर कर कोर्ट को बताया कि मायावती, प्रदीप सिंह, ओपी सिंह, ऊषा चौधरी और जन्नत जहां के खिलाफ विवेचना जारी है। इस मामले में आरोपियों के हाजिर नहीं होने पर कोर्ट ने सभी के खिलाफ वारंट जारी किया है। इसी घटना को लेकर उसी दिन हजरतगंज के दरोगा शिवा साकेत सोनकर ने भी रिपोर्ट दर्ज कराई थी।