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इंटरनेशनल कॉल को लोकल बनाकर करते थे करोड़ों का 'खेल', सऊदी अरब से गिरोह चलाता था सरगना, दो गिरफ्तार

Sun, 12 Nov 2017 09:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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आरोपियों के पास कई देशों के वाउचर बरामद हुए हैं - फोटो : amar ujala
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इंटरनेशनल कॉल को लोकल बनाकर करोड़ों रुपए की हेराफेरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश रविवार को हुआ। इस गिरोह के दो सदस्य कृष्णानगर पुलिस के हत्थे चढ़ गए। जबकि सरगना सऊदी अरब में बैठा है। अवैध रुप से निजी टेलीफोन एक्सचेंज चलाकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का चूना लगा रहे थे। साथ ही देश की सुरक्षा को खुली चुनौती दे रहे थे। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में अवैध पासपोर्ट, सिमकार्ड, लैपटॉप, डाटा केबिल, राउडर व बाउचर बरामद हुए।
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एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि खुफिया विंग की विशेष शाखा से कुछ दिन पहले इस इंटरनेशनल कॉल रैकेट के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद एएसपी पूर्वी सर्वेश मिश्रा, सीओ कृष्णानगर लालप्रताप सिंह और इंस्पेक्टर कृष्णानगर अंजनी पांडेय के साथ स्पेशल टीम को लगाया गया। टीम ने शनिवार रात को इस गिरोह का खुलासा किया। पुलिस टीम ने गोरखपुर के तिवारीपुर जफर कालोनी निवासी नूर मोहम्मद और गुलहरिया थानाक्षेत्र के सेला भटोलिया निवासी मनोज कुमार गुप्ता को बाराबीरवा चौराहे से दबोच लिया।

इंटरनेट से कनवर्ट करते थे इंटरनेशनल कॉल
एसएसपी के मुताबिक पकड़े गए आरोपी इंटरनेट के जरिए इंटरनेशनल कॉल का लोकल में कनवर्ट कर देते थे। इसके बाद अपने निजी सिम नंबर के जरिए खाड़ी देश में रहने वाले लोगों के परिवार के नंबर फारवर्ड कर देते थे। इस तरह के सभी कॉल नेशनल गेटवे के माध्यम से नहीं आती थी। इनका रिकार्ड भी किसी भी टेलीकॉम कंपनी और ट्राई के पास नहीं रहता। इन कॉल्स की मॉनिटरिंग करना भी आसान नहीं है। पुलिस से बचने के लिए इन आरोपियों ने टूर एंड ट्रैवेल्स कंपनी खोल रखी थी। ताकि किसी को भी संदेह न हो। इस तरह के कॉल को काफी आसानी से बिना किसी गेटवे की मदद से कांफ्रेंसिंग कराई जाती थी।
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खुफिया विंग ने दी लखनऊ पुलिस को जानकारी

- फोटो : amar ujala
एसएसपी दीपक कुमार के मुताबिक इस तरह की हेराफेरी काफी दिनों से चल रही थी। ये जालसाज बेखबर होकर अपना काम कर रहे थे। सस्ते इंटरनेशनल कॉल की सूचना मिलने पर खुफिया विंग ने अपनी टीम लगाई। एक-एक कर कई जानकारियां हासिल करने के बाद लखनऊ पुलिस को इसके बारे में बताया। इसके बाद इन्हें दबोचा गया।

जुलाई में शुरू किया अवैध कारोबार
एएसपी पूर्वी सर्वेश मिश्रा ने बताया कि आरोपी 2015 में गोरखपुर में एक टूर एंड ट्रैवेल्स कंपनी खोली थी। इस कंपनी के माध्यम से कमाई अच्छी नहीं होती थी। इसी बीच नूर मोहम्मद अपने दोस्त उरुवा बाजार निवासी नसीम के साथ दो बार सऊदी अरब गया। वहां पर पूर्वांचल और यूपी के लोगों को घर पर बात करने के लिए ज्यादा पैसे लगने से काफी दिक्कतें देख। नसीम के कहने पर उसने सस्ते कॉल दर पर बात कराने के लिए निजी एक्सचेंज लगाने का काम शुरू किया। इसकी शुरूआत गोरखपुर में की, लेकिन वहां यह योजना फ्लाप हो गई। गोरखपुर में हाईस्पीड कनेक्शन न मिलने से उनकी योजना सफल नहीं  हो सकी। इसके बाद नसीम के कहने पर लखनऊ आया।

नसीम ने नूर मोहम्मद को लखनऊ में ऑफिस खोलकर काम करने के लिए 50 हजार रुपए सेलरी देने की बात कही। इसी साल जुलाई में लखनऊ पहुंचकर नूर ने हजरतगंज के तेजकुमार प्लाजा में एक ऑफिस खोला। वहां एक हाईस्पीड कनेक्शन लिया। इसके बाद टेलीकॉलिंग का गोरखधंधा शुरू किया। सीओ कृष्णानगर लालप्रताप सिंह ने बताया कि नूर मोहम्मद ने नसीम के इशारे में लखनऊ में पहला सेटअप डाला।

पहले कनेक्शन से अभी 15 दिन भी नहीं हुए थे। कमाई देख नूर ने नसीम से बातचीत की। इसके बाद 20वें दिन ही दूसरा हाईस्पीड कनेक्शन ले लिया। यहां से काम बढ़ता गया तो उसने घर पर भी एक सेटअप डाल दिया। वहां से काम करने के लिए एक साथी की तलाश की। जो मनोज कुमार गुप्ता के रुप में पूरी हुई। नूर जहां ऑफिस से इंटरनेशनल कॉलिंग कराता था तो वही मनोज घर से यह सुविधा उपलब्ध कराता था।

एक कॉल की कीमत एक से 10 रुपए

- फोटो : amar ujala
इंस्पेक्टर कृष्णानगर अंजनी कुमार पांडेय ने बताया कि खाड़ी देशों में एक इंटरनेशनल कॉल की कीमत 15 से 16 रुपए होती है। यह सुविधा बीएसएनएल के साथ अन्य टेलीकॉम कंपनियां कराती है। लेकिन इन जालसाजों ने खाड़ी देश में मौजूद लोगों को एक रुपए से 10 रुपए तक के दाम पर यह काल उपलब्ध कराते थे। कॉल की कीमत सऊदी में बैठा नसीम तय करता था। इनका नेटवर्क पूरे प्रदेश में फैला है।

हर जिलों खाड़ी देश में नौकरी करने वालों के परिवारीजनों से यह गिरोह बात कराता था। गिरोह का सरगना एक बार नंबर उपलब्ध कराता था। उसी नंबर पर आईडी तैयार की जाती थी। जिस पर विशेष पासवर्ड दिया जाता था। इसके बाद उस नंबर से कॉल कराई जाती थी। खाड़ी देश में रहने वाले लोग दिन में कम से कम एक बार कॉल करते थे। जिसका कॉल टाईम कम से कम पांच मिनट और अधिकतम 15 मिनट का होता था। इसके बाद कॉल की रकम वसूलने के बाद नसीम लखनऊ में बैठे दोनों साथियों को आईसीआईसीआई बैंक के अकाउंट और पेटीएम के जरिए भुगतान करता था।
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पाकिस्तान, सऊदी सहित कई मुस्लिम देश के बाउचर बरामद

- फोटो : amar ujala
इंस्पेक्टर अंजनी कुमार ने बताया कि यह गिरोह सिर्फ यूपी और पूर्वांचल तक नहीं सिमटा है। इसके तार कई मुस्लिम देशों से जुड़े हैं। इन जालसाजों के पास से पाकिस्तान, सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों के रिचार्ज बाउचर बरामद हुए। कॉल करने वालों को जिन देशों में बात करनी होती थी। वहीं के रिचार्ज बाउचर के जरिए सुविधा उपलब्ध कराते थे।

इन बाउचर के जरिए ग्राहक को वह टॉक टाइम देते थे। ताकि लोगों को आसानी से बात कराई जा सके। इन देशों के रिचार्ज बाउचर लखनऊ में मिलना सुरक्षा को खुली चुनौती देना है। अभी तक इस तरह के बाउचर कहीं नहीं मिले। पुलिस खुफिया विंग के साथ इन जालसाजों के मुस्लिम देशों से किस तरह के संपर्क है। कहां से इनको रिजार्च बाउचर मिलता था इसकेबारे में जानकारी हासिल कर रही है।

इन सामानो की हुई बरामदगी
एसएसपी के मुताबिक पुलिस की छापेमारी में इंटरनेशनल जालसाजों के ऑफिस और घर से तीन सिम बॉक्स, 113 सिम (100 बीएसएनएल और 13 टेलीनॉर), 22 पासपोर्ट, एक लैपटॉप, दो मॉडम राउडर, दो बेसिक टेलीफोन, नौ एंटीना, तीन मोबाइल, 50 कॉलिंग मिनट स्लिप प्रिंट हुई सीट, डाटा कनेक्टर पावर स्टेशन केबिल बरामद किया।
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