...और मुस्कराते हुए निकल गया भाजपा नेता समेत तीन की हत्या का आरोपी
नोएडा में डेढ़ साल पहले भाजपा नेता समेत तीन की हत्या का आरोपी पुलिस की खेल की वजह से सलाखों के पीछे नहीं पहुंच सका। उसकी गिरफ्तारी की भनक लगते ही पैरवी शुरू हो गई।
उधर, विवेचक गाजियाबाद से गैर जमानती वारंट लेकर पहुंचे, लेकिन अफसरों की फटकार पर दिल पकड़कर बैठ गए और कोर्ट के बजाय अस्पताल का रास्ता पकड़ लिया।
पुलिस ने बुधवार को शस्त्र अधिनियम के तहत आरोपी को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया और विवेचक हत्याकांड में रिमांड की अर्जी दाखिल करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। लिहाजा वह जमानती अपराध में रिहा हो गया।
कैसरबाग पुलिस ने भाजपा नेता व स्कूल संचालक शिवकुमार यादव, उनके निजी सुरक्षाकर्मी रहीसपाल और वाहन चालक बलीनाथ की सरेराह गोली मारकर हत्या के मामले में मंगलवार को गाजियाबाद के न्यू विजयनगर निवासी अमन यादव को गिरफ्तार जरूर किया, लेकिन उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने में नाकाम रही।
पुलिस ने लाइसेंसी पिस्टल के साथ क्षमता से अधिक कारतूस बरामद होने पर उसका शस्त्र अधिनियम में चालान किया और तिहरे हत्याकांड की विवेचना कर रहे गाजियाबाद क्राइम ब्रांच के निरीक्षक अशोक पाल सिंह को सूचना दी।
तय हुआ कि कैसरबाग पुलिस शस्त्र अधिनियम के तहत कोर्ट में प्रस्तुत करेगी और निरीक्षक नोएडा के सीजेएम की ओर से जारी गैर जमानती वारंट के साथ अमन की रिमांड की अर्जी देंगे।
अफसरों की फटकार से गैर जमानती वारंट बेअसर
गिरफ्तारी पर अमन ने पुलिस महानिदेशक मुख्यालय में तैनात अधिकारी को कॉल कर मदद मांगी। उन्होंने उसे छोड़ने के आदेश दिए। पुलिसवालों ने तिहरे हत्याकांड के वादी योगेश यादव की ओर से 100 नंबर पर कॉल किए जाने पर गिरफ्तारी का हवाला देते हुए अमन से .32 बोर की लाइसेंसी पिस्टल, 29 कारतूस व मैगजीन बरामद होने की बात कही। दबाव बनते देख पुलिस ने अमन को कैसरबाग कोतवाली ले जाकर शस्त्र अधिनियम की धारा-30 में केस कर दिया। अमन की गिरफ्तारी की सूचना पर विवेचक अशोक पाल गैर जमानती वारंट लेकर लखनऊ को रवाना हुए। वहीं, पुलिस के कई अफसर अमन की रिहाई का दबाव बनाने लगे। उनकी फटकार पर विवेचक ने गैर जमानती वारंट बैग में बंद कर लिए।
आरोपी की रिहाई के बाद दूर हो गया दिल का दर्द
विवेचक को अफसरों के आगे घुटने टेकने पड़े, लेकिन बैरंग लौटना भी जोखिम भरा था। वह गाजियाबाद क्राइम ब्रांच के रोजनामचे में लिखा-पढ़ी कर लखनऊ रवाना हुए थे और कैसरबाग पुलिस उनका इंतजार कर रही थी। ऐसे में गैर जमानती वारंट के साथ रिमांड की अर्जी दाखिल न करने पर नौकरी संकट में थी और अफसरों के आदेश की अवहेलना भी नहीं कर सकते थे। अमन से सामना होने पर अशोक पाल थाने में दिल थामकर बैठ गए। उन्होंने अचानक तबीयत खराब होने की बात कही। थाने के रोजनामचे में बीमारी का हवाला दर्ज कर अस्पताल रवाना हो गए। उधर, कैसरबाग पुलिस ने अमन को कोर्ट में पेश किया। रिहाई पर वह मुस्कराते हुए चला गया। इसके बाद अशोक पाल की तबीयत भी ठीक हो गई।
दस बार एक ही होटल में ठहरे दोनों पक्ष
भाजपा नेता के भाई योगेश का कहना है कि होटल में मंगलवार को सामना होते ही अमन ने पिस्टल निकालने की कोशिश की थी, लेकिन उनके अंगरक्षक ने उसे कवर कर लिया। योगेश ने कहा कि वह मुकदमे की पैरवी में लखनऊ आने पर दस बार उसी होटल में ठहरे थे। पता चला कि उन्हीं दिनों अमन भी यहीं था। योगेश ने हत्या के इरादे से रेकी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। आरोपियों की पैरवी कर रहे अफसरों पर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को अर्जी भेजी है।
कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक की बात
कैसरबाग कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सिंह का कहना है कि नोएडा के बहलोलपुर निवासी योगेश ने अमन को होटल में देखकर कंट्रोल रूम को फोन किया। पुलिस ने अमन के पास से लाइसेंसी पिस्टल, मैगजीन व 29 कारतूस बरामद किए। योगेश ने गैर जमानती वारंट की प्रति दिखाई। इस पर विवेचक अशोक पाल सिंह से फोन पर संपर्क किया गया। उन्होंने वारंट की पुष्टि के साथ जल्द लखनऊ पहुंचने की बात कही और अगले दिन अमन का चालान भेजे जाने से पहले पहुंच गए। हालांकि, थाने में अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने रोजनामचे में ब्योरा दर्ज किया और अस्पताल चले गए। पुलिस ने अमन को शस्त्र अधिनियम की धारा-30 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। उसे जमानत मिल गई।
24 घंटे में किया कोर्ट में पेश
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने बताया कि अमन से क्षमता से अधिक कारतूस मिलने पर शस्त्र अधिनियम का मुकदमा दर्ज किया और तिहरे हत्याकांड में फरार होने की जानकारी पर गाजियाबाद पुलिस को उसकी गिरफ्तारी की सूचना दी गई। अमन को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया।