विधानसभा सचिवालय में सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) की भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोपों के मामले में यूपी सरकार ने जवाब दाखिल कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार का संक्षिप्त हलफनामा आने के बाद याचियों के वकील को प्रति उत्तर दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया है। न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने यह आदेश अंकुर सरोहा व एक अन्य अभ्यर्थी की याचिका पर दिया।
याचियों के वरिष्ठ अधिवक्ता आईबी सिंह कहना था कि एआरओ की भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली की गई। उन्होंने यचियों की ओएमआर शीट्स के हवाले से कहा कि उत्तर कुंजी के मुताबिक इन अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा में 190 अंक प्राप्त किए। जबकि इनसे बहुत ही कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को सफल घोषित कर दिया गया। इससे पता चलता है कि चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। याचिका में 7 दिसंबर 2020 को जारी भर्ती संबंधी विज्ञापन को भी रद्द किए जाने की गुजारिश की गई है।
उधर, याचिका का विरोध करते हुए सरकारी वकील का कहना था कि याचियों की जिन ओएमआर शीट्स पर उनके अधिवक्ता भरोसा कर रहे हैं, उनमें हेरफेर किया गया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 जुलाई को नियत की है।