सेना अपने 13 लाख जवानों के डीएनए सुरक्षित रखने की तैयारी कर रही है।
पिछले साल सेना ने पुणे में डीएनए बैंक भी तैयार कर लिया है।
अब जवानों के डीएनए इस बैंक में सुरक्षित रखे जाएंगे।
इसकी मदद से सरहद पर प्राकृतिक आपदा या फिर आए दिन होने वाले आतंकी ऑपरेशन के दौरान लापता हुए जवानों का पता लगाने में आसानी होगी।
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सेना बाद में अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस के जवानों का भी डीएनए सुरक्षित रखने में मदद करेगी।
यह जानकारी सेना मेडिकल कोर (एएमसी) केंद्र व कॉलेज के सेनानायक ले. जनरल वीके चोपड़ा ने दी।
वह छह से आठ नवंबर तक लखनऊ छावनी में होने वाले एएमएसी के पुनर्मिलन समारोह को लेकर पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।
समारोह में सेवानिवृत्त अफसर, पूर्व सैनिक, रिक्रूट व जवान अपने परिवार साथ हिस्सा लेंगे।
ले. जनरल ने बताया कि सेना मेडिकल कोर दुर्गम सरहदों पर तैनात जवानों की जीवन रक्षा को लेकर भी आधुनिक प्रणाली अपना रही है। पहाड़ों पर ऑक्सीजन की कमी के कारण जवानों को काफी असुविधा होती है।
साथ ही आतंकी ऑपरेशन में घायल जवानों को गोल्डन हॉवर (शुरुआती एक घंटे) के भीतर ही ऑक्सीजन देने के लिए हल्के ऑक्सीजन सिलेंडर और कम वजन वाले स्ट्रेचर सहित कई आधुनिक उपकरण मुहैया कराए गए हैं।
बताया कि सेना मेडिकल कोर में रिक्रूटों और जवानों के साथ भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं।
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इमरजेंसी मेडिकल हेल्पलाइन के बेहतर परिणाम मिले हैं। सेना के डॉक्टर आम नागरिकों को भी इस हेल्पलाइन से मदद पहुंचा रहे हैं। सेना मेडिकल कोर ने पिछले वर्ष मध्य कमान में 99 चिकित्सा शिविर आम लोगों के लिए लगाए थे।
सेना छोड़ने वाले डॉक्टरों में आई कमी
ले. जनरल वीके चोपड़ा ने बताया कि भारतीय सेना के पास सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की फौज है। हां कुछ बेहतर डॉक्टर अपनी सेवा बीच में छोड़कर निजी अस्पताल चले जाते हैं।
छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सेना की सेवा छोड़ने की संख्या में कमी आई है। उनके असंतोष का कारण प्रमोशन भी है।
कोर में केवल एक सशस्त्र चिकित्सा सेवा का महानिदेशक, 10 ले. जनरल और 50 अधिकारी ही मेजर जनरल बन पाते हैं। बाहर भी सेना में प्रवेश करने के लिए डॉक्टरों की कतार लगी हुई है।
सेना के पास सीमित सीटें हैं इसलिए हम चयन प्रक्रिया के बाद बेहतर डॉक्टर को अपने यहां शामिल करते हैं।
होंगे रंगारंग कार्यक्रम
एएमसी सेनानायक ने बताया कि सेना मेडिकल कोर का पुनर्मिलन समारोह हर चार साल में होता है।
लखनऊ में छह से आठ नवंबर तक होने वाले समारोह में 30 सेवानिवृत्त ले. जनरल, 50 मेजर जनरल, 150 ब्रिगेडियर व कर्नल अपने परिवार साथ हिस्सा लेंगे।
छह नवंबर की सुबह 8:30 बजे पुनर्मिलन समारोह की शुरुआत होगी। सात नवंबर को एएमसी स्मृतिका पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
इसके बाद दीक्षांत परेड होगी। आठ नवंबर को मिलिट्री टैटू, पैरासेलिंग सहित साहसिक प्रदर्शन, बैंड डिस्प्ले और बीटिंग द रिट्रीट आयोजित होगा।
मोटापे के खिलाफ वॉकाथन
सेना के जाने-माने आर्थोपेडिक सर्जन ले. जनरल वीके चोपड़ा ने बताया कि मोटापा बीमारी का कारण होता है।
मोटापे के खिलाफ सेना के पूर्व सैनिक, जेसीओ, अधिकारी और उनका परिवार आठ नवंबर को वॉकाथन में हिस्सा लेगा।
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