आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (एएफटी) लखनऊ ने भारतीय सेना की तीनों विंग को निर्देश दिए हैं कि वे सेना के किसी भी व्यक्ति पर संज्ञेय अपराधों के मामलों में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करवाएं।
एयरफोर्स के स्टॉक से केरोसिन व डीजल चोरी के आरोपों में अक्तूबर 2001 में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मार्शल से सजा पाए कानपुर के सैनिक चंद्रभूषण यादव की अपील को स्वीकार करते हुए एएफटी ने मंगलवार को यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया।
एएफटी ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मार्शल के फैसले को रद्द करते सैनिक को सभी सेवा लाभ देने के निर्देश दिए हैं। एएफटी के जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने कहा कि सेना के स्टाफ से जुड़े कई आपराधिक मामलों में थल सेना, वायुसेना और नौसेना एफआईआर दर्ज नहीं करवाती है।
संज्ञेय अपराधों में भी ऐसा किया जाता है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में इन मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए निर्देश दिए हैं। सीआरपीसी के सेक्शन 154 में भी इसकी अनिवार्यता बताई गई है।